आईबीसी कानून आने के बाद हो चुकी है चार लाख करोड़ रुपये की वसूलीः आईबीबीआई प्रमुख

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आईबीसी कानून आने के बाद हो चुकी है चार लाख करोड़ रुपये की वसूलीः आईबीबीआई प्रमुख

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  • Publish Date - May 28, 2026 / 03:30 PM IST,
    Updated On - May 28, 2026 / 03:30 PM IST

नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) लागू होने के 10 साल के भीतर कर्ज समाधान प्रक्रियाओं के जरिये कर्जदाताओं को चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हुई है।

भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के प्रमुख रवि मित्तल ने बताया कि मार्च, 2026 तक इस कानून के तहत 1,419 मामलों में समाधान योजनाएं लागू हुईं, जिनसे कर्जदाता चार लाख करोड़ रुपये से अधिक बकाया की वसूली करने में सफल रहे। यह राशि उनके ‘उचित मूल्य’ का 95 प्रतिशत और ‘परिसमापन मूल्य’ का 167 प्रतिशत है।

मित्तल ने आईबीसी कानून लागू होने के 10 साल पूरे होने पर जारी अपने संदेश में कहा कि इस कानून का निवारक प्रभाव भी स्पष्ट है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष दाखिल 30,000 से अधिक मामले प्रवेश-पूर्व चरण में ही समझौते या वापसी के जरिये निपटा लिए गए। इन मामलों में करीब 14 लाख करोड़ रुपये की राशि शामिल थी।

आईबीबीआई प्रमुख ने कहा कि ये समझौते दर्शाते हैं कि आईबीसी ने कर्जदाता और कर्जदार के बीच संबंधों को बदला है और औपचारिक दिवाला प्रक्रिया से पहले ही वित्तीय संकट के समाधान को बढ़ावा दिया है।

मार्च, 2026 तक कुल 8,987 मामलों को एनसीएलटी में स्वीकार किया गया, जिनमें से 7,102 मामलों का निपटान हो चुका है। बंद हो चुके मामलों में 4,099 कंपनियां (करीब 58 प्रतिशत) सफलतापूर्वक फिर खड़ी हो गईं, जबकि 3,003 मामलों में उन्हें बंद कर दिया गया।

मित्तल ने कहा कि पुनरुद्धार वाली कंपनियों में से 1,388 मामलों का निपटारा अपील, समीक्षा या समझौते के जरिये हुआ, जबकि 1,292 मामलों को वापस ले लिया गया।

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आईबीसी ने भारत में कारोबारी संकट के समाधान के तरीके को बदल दिया है।

सीतारमण के कार्यालय ने कहा कि इस कानून ने पहले की जटिल और कर्जदार के नियंत्रण वाली प्रक्रिया को बदलकर एक ऐसी प्रणाली बनाई है, जिसमें कर्जदाता प्रमुख भूमिका निभाते हैं और मामलों का समाधान तय समय में होता है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय