जर्मन कंपनी बीप्लसएच सॉल्यूशंस भारत में नैनो-उर्वरक विस्तार के लिए 10 लाख यूरो का निवेश करेगी

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जर्मन कंपनी बीप्लसएच सॉल्यूशंस भारत में नैनो-उर्वरक विस्तार के लिए 10 लाख यूरो का निवेश करेगी

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  • Publish Date - May 25, 2026 / 02:31 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 02:31 PM IST

(लक्ष्मी देवी एरे)

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) जर्मनी की कृषि प्रौद्योगिकी कंपनी बीप्लसएच सॉल्यूशंस जीएमबीएच ने भारतीय बाजार में अपने विस्तार की योजना बनाई है और वर्ष 2026 में 10 लाख यूरो के निवेश का लक्ष्य रखा है।

कंपनी ने यह कदम भारत में अपनी धातु-आधारित नैनो-फर्टिलाइजर तकनीक की बढ़ती मांग और हालिया नियामकीय मंजूरी के बाद उठाया है।

कंपनी ने बताया कि भारत में वह अपने उत्पादों का विपणन अपनी अनुषंगी इकाई ‘डॉ. हेनीश एग्री सॉल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के माध्यम से करती है, जिसे 2022 में स्थापित किया गया था। वर्ष 2025 में कंपनी की वैश्विक बिक्री दो करोड़ यूरो रही।

बीप्लसएच सॉल्यूशंस जीएमबीएच की महाप्रबंधक और मुख्य विज्ञान अधिकारी (सीएसओ) डॉ. लॉरा वीलर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ) के तहत नैनो पंजीकरण मिलने के बाद हम इस साल को लेकर बेहद उत्साहित हैं और 2026 में भारत में 10 लाख यूरो के निवेश की योजना बना रहे हैं।’

उन्होंने बताया कि पारंपरिक नाइट्रोजन आधारित उर्वरक जैसे नैनो यूरिया के विपरीत कंपनी के उत्पाद धातु-आधारित नैनो प्रौद्योगिकी समाधान हैं, जिनमें मुख्य रूप से चांदी और तांबे के नैनोकणों का उपयोग होता है। इन्हें कंपनी ‘फर्टिलाइजर प्लस’ के रूप में परिभाषित करती है।

इन उत्पादों का उद्देश्य पौधों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना, रोगों के दबाव को कम करना और पौध संरक्षण एजेंट के रूप में कार्य करना है।

डॉ. वीलर ने कहा, ‘हमारा मानना है कि पारंपरिक उर्वरक बाजारों को प्रभावित करने वाली समस्याओं का असर हम पर नहीं पड़ेगा।’

उन्होंने उम्मीद जताई कि बाजार में जागरूकता बढ़ने के साथ ही वर्ष 2026 में कंपनी को मजबूत वृद्धि हासिल होगी।

कंपनी के अनुसार, वर्तमान में भारत में आठ उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनमें एग्रोबीज शामिल है, जिसमें विशेष रूप से भारतीय कृषि के लिए विकसित किया गया है।

भाषा योगेश अजय

अजय