मैं टर्मिनेटर हूं, अभिषेक टर्मिनेटर चार है और वैभव टर्मिनेटर छह है: युवराज

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मैं टर्मिनेटर हूं, अभिषेक टर्मिनेटर चार है और वैभव टर्मिनेटर छह है: युवराज

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 02:05 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 02:05 PM IST

लंदन, 13 जुलाई (भाषा) अपने जमाने के धाकड़ बल्लेबाज युवराज सिंह ने बेखौफ होकर खेलने वाले भारतीय बल्लेबाजों को अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर अभिनीत प्रतिष्ठित हॉलीवुड फिल्म ‘टर्मिनेटर’ के विभिन्न संस्करणों की तर्ज पर खुद को टर्मिनेटर, अभिषेक शर्मा को टर्मिनेटर चार और वैभव सूर्यवंशी को टर्मिनेटर छह बताया।

अभिषेक के लिए मार्गदर्शक का काम करने वाले भारत के पूर्व ऑलराउंडर युवराज का मानना है कि 15 वर्षीय सूर्यवंशी आक्रामक बल्लेबाजी के विकास में अगला कदम है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें इस युवा खिलाड़ी के साथ काम करने का मौका मिलता है तो उन्हें खुशी होगी।

युवराज ने जियोहॉटस्टार से कहा, ‘‘मैं खुद को टर्मिनेटर कहता हूं। अब अभिषेक शर्मा के रूप में टर्मिनेटर चार आ गया है क्योंकि वह मुझसे चार गुणा बेहतर है। अब वैभव सूर्यवंशी के रूप में टर्मिनेटर छह आ गया है।’’

अभिषेक और सूर्यवंशी के साथ विंबलडन का पुरुष एकल का फाइनल देखने वाले युवराज ने कहा, ‘‘मैंने अपने समय में अपना काम किया, अभिषेक ने इसे और आगे बढ़ाया और अब वैभव नए मानक स्थापित कर रहा है। यह उसी सफर का तीसरा चरण है। खेल को इस तरह विकसित होते देखना बहुत अच्छा लगता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं (यानिक) सिनर और (कार्लोस) अल्काराज़ को देखता हूं, तो मुझे टेनिस में हो रहे बदलाव नज़र आते हैं। अभिषेक और वैभव में भी मुझे यही विकास दिखाई देता है। मैंने अभिषेक के साथ काफी समय बिताया है और मैं वैभव के साथ भी समय बिताना चाहूंगा। उसका भविष्य उज्ज्वल है।’’

सूर्यवंशी ने भी कहा कि युवराज के साथ बातचीत से उन्हें तकनीक से परे भी कई अमूल्य सबक मिले।

उन्होंने कहा, ‘‘युवी पाजी मेरे भी आदर्श हैं। उनसे पहली बार मिलना एक खास पल था। मुझे उनके साथ समय बिताने का मौका मिला और उन्होंने खेल के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें बताई।’’

सूर्यवंशी ने कहा, ‘‘उन्होंने खेल के मानसिक पहलू, दबाव से निपटने के तरीके और आत्मविश्वास के महत्व के बारे में बात की। मुझे उम्मीद है कि इससे मुझे भविष्य में काफी मदद मिलेगी।’’

अभिषेक ने सूर्यवंशी के बारे में कहा, ‘‘मैं समझ सकता हूं कि वैभव इस समय कैसा महसूस कर रहा है क्योंकि युवराज पाजी मेरे भी आदर्श हैं। मुझे याद है जब मैं उनसे पहली बार मिला था, तब मुझे भी कुछ ऐसा ही महसूस हुआ था जैसा कि अभी वैभव महसूस कर रहा है।’’

भाषा

पंत

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