नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) वैश्विक कंपनियों और संस्थागत निवेशकों का भारत को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है। इन कंपनियों ने हाल के महीनों में भारत में 90 अरब डॉलर से अधिक के नए निवेश की घोषणाएं की हैं। यह वैश्विक स्तर पर तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद देश की दीर्घकालिक वृद्धि की संभावनाओं में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
सूत्रों के मुताबिक, ये निवेश की प्रतिबद्धताएं कृत्रिम मेधा (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल बुनियादी ढांचा, विनिर्माण और औद्योगिक प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में की गई हैं। ये प्रतिबद्धताएं ऐसे समय जतायी गयी हैं जब दुनिया भर की कंपनियां व्यापार में बाधाओं और पश्चिम एशिया में अस्थिरता से जूझ रही हैं।
सबसे बड़ी प्रतिबद्धताओं में से एक, फरवरी में गूगल ने पांच साल में भारत में एआई बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए 15 अरब डॉलर के निवेश की योजना का ऐलान किया। इसमें डेटा सेंटर, समुद्र के भीतर संपर्क सुविधा, क्लाउड क्षमता और कार्यबल कौशल पहल शामिल हैं।
इसके बाद मार्च में औद्योगिक प्रौद्योगिकी समूह एबीबी ने प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में विनिर्माण और शोध क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 7.5 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की।
ऑस्ट्रेलिया की एयर ट्रंक ने 2030 तक भारत में पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने के लिए 30 अरब डॉलर के निवेश की योजना की घोषणा की। यह देश के इतिहास में डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए किए गए सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धताओं में से एक है।
कनाडा पेंशन योजना निवेश बोर्ड ने भी सीटीआरएलएस डेटासेंटर्स के साथ मिलकर हाइपरस्केल डेटा सेंटर क्षमता का विस्तार करने और भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 7,000 करोड़ रुपये तक के निवेश की प्रतिबद्धता जतायी।
फ्रांस की भवन सामग्री बनाने वाली कंपनी सेंट गोबेन ने 18 जून को कहा कि वह अगले पांच वर्षों में भारत में अतिरिक्त एक अरब यूरो का निवेश करेगी। कंपनी ने भारत को दुनिया भर में अपने सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बताया।
सबसे नया और सबसे बड़े निवेश की प्रतिबद्धता अमेजन ने जतायी है। कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और 2030 तक भारत में कंपनी के निवेश की प्रतिबद्धता को बढ़ाकर 48 अरब डॉलर करने की योजना की घोषणा की। इसमें एआई और क्लाउड बुनियादी ढांचे में निवेश शामिल है।
वैश्विक कंपनियों की निवेश की घोषणाएं भारत के प्रति बढ़ते आकर्षण को दिखाती है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत को भविष्य की वृद्धि, डिजिटल बदलाव और विनिर्माण के विस्तार के लिए एक अहम केंद्र के तौर पर देख रही हैं।
सूत्रों ने कहा कि इन सभी प्रतिबद्धताओं से पता चलता है कि वैश्विक कंपनियों का भारत पर भरोसा बढ़ रहा है, जबकि दूसरी जगहों पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण हालात साफ नहीं हैं।
भाषा रमण अजय
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