वैश्विक डिजिटल मंचों को सांस्कृतिक संदर्भेां का सम्मान, कानून का पालन करना चाहिए: वैष्णव

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वैश्विक डिजिटल मंचों को सांस्कृतिक संदर्भेां का सम्मान, कानून का पालन करना चाहिए: वैष्णव

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 08:52 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 08:52 PM IST

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि डिजिटल सामाग्री तैयार करने वाले वैश्विक मंचों को उन देशों के सांस्कृतिक संदरर्भों से अवगत होना चाहिए जिनमें वे काम करते हैं और वहां के संवैधानिक और कानूनी ढांचे के अनुसार कार्य करना चाहिए।

उन्होंने ‘एआई के युग में हमारे रचनात्मक भविष्य को पुरस्कृत करना – नवाचार, विश्वास और प्रतिभा के माध्यम से भारत को सशक्त बनाना’ विषय से आयोजित मोशन पिक्चर एसोसिएशन के चेयरमैन और सीईओ चार्ल्स रिवकिन के साथ एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एक आधिकारिक सैटेलाइट कार्यक्रम यह बात कही।

मंत्री ने कहा कि वैश्विक ओटीटी और डिजिटल सामग्री मंचों को अपने मूल देश के बजाय उस देश के संवैधानिक और कानूनी ढांचे के अनुसार काम करना चाहिए जिसमें वे कार्यरत हैं।

वैष्णव ने रिवकिन से कहा, ‘‘डिजिटल दुनिया में कोई भौतिक सीमा नहीं होती। ऐसे में ओटीटी मंचों के लिए सांस्कृतिक संदर्भ को भूल जाना बहुत आसान हो जाता है, जो कि बहुत महत्वपूर्ण है। एक समाज में जो सामान्य है, वह दूसरे समाज में सामान्य नहीं हो सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘और मुझे लगता है कि इसीलिए आपके (मोशन पिक्चर एसोसिएशन) और नेटफ्लिक्स जैसे वैश्विक मंचों को उस देश के सांस्कृतिक संदर्भ के प्रति जागरूक होना चाहिए जिसमें वे काम कर रहे हैं।’’

मंत्री ने सरकार के कई कौशल विकास कार्यक्रमों के बारे में बात करते हुए कहा कि इन प्रयासों से वैश्विक मीडिया उद्योग के लिए भारत में आकर काम करने के अधिक अवसर पैदा होंगे।

वैष्णव ने कहा, ‘‘बहुत जल्द, हम ‘भारत में सृजन करो’ मिशन शुरू करने जा रहे हैं। सेमीकंडक्टर मिशन की तरह, यह भी उद्योग-उन्मुख, रोजगार-उन्मुख और भविष्य-उन्मुख मिशन होगा।’’

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल रहे वैष्णव ने कहा, ‘‘इसका मुख्य उद्देश्य होगा: पहला, हमारे पास जो कुछ है उसे मजबूत करना, दूसरा, यह सुनिश्चित करना कि हम सृजन के लिए दुनिया का सबसे पसंदीदा मंच बनें, तीसरा, भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाओं की ऐसी श्रृंखला तैयार करना जो अगले 25 वर्षों के लिए आवश्यक विकास को बनाए रखे।’’

भाषा रमण अजय

अजय