गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप का ऊर्जा समाधान कारोबार को 2026-27 में 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप का ऊर्जा समाधान कारोबार को 2026-27 में 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप का ऊर्जा समाधान कारोबार को 2026-27 में 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य
Modified Date: March 17, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: March 17, 2026 4:20 pm IST

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप ने अपने ऊर्जा समाधान कारोबार में वित्त वर्ष 2026-27 में 20 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक उसकी 2,600 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रक्रियाधीन होंगी।

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के ऊर्जा समाधान कारोबार के प्रमुख राघवेंद्र मिर्जी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ हमारी ऑर्डर बुक अभी 2,600 करोड़ रुपये की है। अगले 15 दिन में जब हम इस वर्ष को समाप्त करेंगे, तो लगभग 15 प्रतिशत वृद्धि दर्ज करेंगे। अगले वित्त वर्ष में भी हम करीब 15-20 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रख रहे हैं।’’

वित्त वर्ष 2025-26 की ऑर्डर बुक में पारेषण अवसंरचना, रेलवे विद्युतीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं।

परियोजनाओं के भौगोलिक वितरण पर मिर्जी ने कहा कि गुजरात और राजस्थान बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना के निर्माण में अग्रणी हैं। इसलिए, ‘‘हमारी अधिकतर परियोजनाएं फिलहाल इन दो राज्यों में केंद्रित हैं।’’

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बढ़ती औद्योगिक एवं शहरी मांग पारेषण अवसंरचना और ग्रिड आधुनिकीकरण में निवेश को बढ़ावा दे रही है।

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के ऊर्जा समाधान कारोबार के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से विद्युत अवसंरचना के लिए ईपीसी (इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण) परियोजनाओं में संलग्न है, जिसमें पारेषण लाइन तथा बिजली सबस्टेशन का निर्माण शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा अधिक ध्यान बिजली सबस्टेशन पर है। हम 765 किलोवाट तक के बिजली सबस्टेशन बनाने की परियोजनाएं लेते हैं।’’

क्षेत्र की चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में बिजली क्षेत्र में अचानक वृद्धि देखी गई है और आने वाले वर्षों में भारी वृद्धि की संभावना है, लेकिन पूरी आपूर्ति श्रृंखला की क्षमता इस वृद्धि के अनुरूप नहीं है।

मिर्जी ने कहा, ‘‘ यह एक चुनौती है क्योंकि कुछ उपकरणों तथा कलपुर्जों के लिए क्षमता में उतनी वृद्धि नहीं हुई है जितनी की आवश्यकता है। हमें इस कारण कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी अपने प्रमुख विक्रेताओं के साथ मिलकर उनकी क्षमता बढ़ाने में निवेश कर रही है।’’

उन्होंने कहा कि इसके अलावा भारत में कुशल श्रम की उपलब्धता भी एक चुनौती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम पिछले कुछ वर्षों से यह देख रहे हैं। परियोजनाओं में वृद्धि के साथ ऐसे कौशल स्तर की उपलब्धता भी एक चुनौती बनती जा रही है।’’

पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव के बारे में मिर्जी ने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है और कंपनी ‘‘इस पर नजर रखे हुए है तथा नियमित रूप से जानकारी ले रही है।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय


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