भारत के लिए चीनी निर्यात का अच्छा अवसर, निर्यात सब्सिडी इस सत्र में भी जारी रखने की संभावना: सरकार

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भारत के लिए चीनी निर्यात का अच्छा अवसर, निर्यात सब्सिडी इस सत्र में भी जारी रखने की संभावना: सरकार

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  • Publish Date - November 8, 2020 / 03:13 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:02 PM IST

(लक्ष्मी देवी)

नयी दिल्ली, आठ नवबंर (भाषा) खाद्य सचिव सुधांशु पाण्डेय ने कहा है कि भारत के पास 2019-20 में नवंबर-अप्रैल के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी बेचने का अच्छा अवसर है। इसकी के मद्देनजर मंत्रालय में एक प्रस्ताव पर विचार चल रहा है कि चीन पर निर्यात सब्सिडी को चालू विपणन सत्र के लिए बढा दिया जाए।

वैसे कुछ दिन पहले वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि यह सब्सिडी आगे और जारी रखने का कोई विचार नहीं है।

पाण्डेय ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘इस साल थाईलैंड में उत्पादन कम होने का अनुमान है, जबकि ब्राजील की पेराई अप्रैल 2021 में शुरू होगी। ऐसे में अब से लेकर अप्रैल तक भारत के लिए निर्यात का अच्छा अवसर है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक अवसर है, उद्योग को इसका फायदा उठाना है। भारत को इस साल चीनी का बंपर उत्पादन होने की उम्मीद है और हम इस साल अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं।’’

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार खाद्य मंत्रालय 60 लाख टन की मौजूदा चीनी निर्यात नीति के सत्र 2020-21 में विस्तार के लिए कैबिनेट की मंजूरी के प्रस्ताव तैयार कर रहा है।

सूत्रों ने कहा कि खाद्य मंत्री पीयूष गोयल ने 30 अक्टूबर को कहा था कि सरकार निर्यात सब्सिडी नीति के विस्तार पर विचार नहीं कर रही है, लेकिन हितधारकों और नीति निर्माताओं के साथ कई दौर की बातचीत के बाद अब प्रस्ताव पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना ​​है कि चीनी कीमतें उत्पादन लागत से कम न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए भारत को इस साल 50 लाख टन से अधिक चीनी का निर्यात करने की आवश्यकता है।

भारत ने चीनी के अतिरिक्त स्टॉक को कम करने और गन्ना किसानों को भुगतान करने में नकदी संकट से जूझ रहे चीनी मिलों की मदद के लिए पिछले दो वर्षों के दौरान निर्यात सब्सिडी दी थी। जिसकी मियाद सितंबर में समाप्त पिछले सत्र में पूरी हो चुकी है।

चीनी मिलों ने आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) चीनी विपणन सत्र के लिए निर्धारित 60 लाख टन के अनिवार्य कोटा के मुकाबले 57 लाख टन चीनी का निर्यात किया।

भाषा पाण्डेय मनोहर

मनोहर