निर्यातकों की ‘चिंता’ दूर करने के लिए सरकार ने 497 करोड़ रुपये की ‘रिलीफ’ योजना को मंजूरी दी

निर्यातकों की 'चिंता' दूर करने के लिए सरकार ने 497 करोड़ रुपये की ‘रिलीफ’ योजना को मंजूरी दी

निर्यातकों की ‘चिंता’ दूर करने के लिए सरकार ने 497 करोड़ रुपये की ‘रिलीफ’ योजना को मंजूरी दी
Modified Date: March 19, 2026 / 08:01 pm IST
Published Date: March 19, 2026 8:01 pm IST

नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न बाधाओं का सामना कर रहे निर्यातकों को सहायता प्रदान करने के लिए बृहस्पतिवार को 497 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली ‘रिलीफ’ (रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन) योजना शुरू की।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, ‘भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम’ (ईसीजीसी) को इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है, जिसके तहत निर्यात दायित्वों का स्वचालित विस्तार, लॉजिस्टिक सहायता और परिवहन में देरी को प्रबंधित करने के लिए वित्तीय उपाय शामिल किए गए हैं।

इस हस्तक्षेप का उद्देश्य माल ढुलाई में असाधारण वृद्धि, बढ़े हुए बीमा प्रीमियम और खाड़ी क्षेत्र के समुद्री गलियारे में व्यवधानों से उत्पन्न युद्ध-संबंधी निर्यात जोखिमों से भारतीय निर्यातकों को बचाना है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संवाददाताओं से कहा कि निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत घोषित यह नई योजना विशेष रूप से उन 17-18 भौगोलिक क्षेत्रों पर केंद्रित है जो इस संघर्ष से प्रभावित हुए हैं, ताकि निर्यातकों के सामने आ रही चुनौतियों को कम किया जा सके।

उन्होंने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण व्यापारिक माहौल पर असर पड़ा है और विशेष रूप से खाड़ी देशों के साथ व्यापार करने वाले निर्यातकों के बीच ‘चिंता का भाव’ देखा जा रहा है।

सचिव के अनुसार, ऐसी कई स्थितियां बनी हैं जहां पश्चिम एशिया के देशों के लिए भेजे गए निर्यात अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए हैं और इससे भविष्य के ऑर्डर भी प्रभावित हो रहे हैं।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के महानिदेशक लव अग्रवाल ने स्थिति की गंभीरता स्पष्ट करते हुए बताया कि निर्यातकों को ‘दोहरा झटका’ लगा है क्योंकि हवाई और समुद्री मार्ग से ढुलाई दोनों ही बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। लॉजिस्टिक लागत में भारी वृद्धि, युद्ध-जोखिम प्रीमियम और आपातकालीन अधिभार के कारण चुनौतियां बढ़ी हैं।

उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर माल जमा होने के कारण जल्द खराब होने वाले और शीत भंडारण वाले कार्गो सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण जहाजों को लंबे समुद्री मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे ‘ट्रांसशिपमेंट’ केंद्रों पर भीड़भाड़ और परिचालन अनिश्चितता पैदा हो गई है।

योजना के कार्यान्वयन के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) का गठन किया गया है, जिसमें वाणिज्य, पेट्रोलियम, नौवहन, विदेश मंत्रालय और आरबीआई के अधिकारी शामिल हैं, जो माल की आवाजाही के आधार पर प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा करेंगे।

योजना का पहला हिस्सा उन निर्यात दायित्वों के स्वचालित विस्तार से जुड़ा है जिनकी समय-सीमा एक मार्च से 31 मई, 2026 के बीच समाप्त हो रही है। इन्हें अब बिना किसी जुर्माने के 31 अगस्त, 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यह व्यवस्था 14 फरवरी से 15 मार्च के बीच ईसीजीसी द्वारा पहले से बीमित खेपों को सुरक्षा प्रदान करती है।

योजना का दूसरा हिस्सा आगामी 16 मार्च से 15 जून तक की तीन महीने की अवधि में होने वाले निर्यात के लिए ईसीजीसी कवरेज को सुगम बनाने पर केंद्रित है।

योजना का तीसरा महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को अधिभार के झटकों से बचाने के लिए बनाया गया है। इसके तहत 14 फरवरी से 15 मार्च के बीच की अवधि में हुई असाधारण माल ढुलाई और बीमा लागत की आंशिक प्रतिपूर्ति की जाएगी, जो उन एमएसएमई निर्यातकों पर लागू होगी जिन्होंने ईसीजीसी कवर नहीं लिया है।

ईसीजीसी दावों और कोष के उपयोग की तत्काल आधार पर निगरानी के लिए एक डैशबोर्ड-आधारित निगरानी प्रणाली बनाएगा। मंत्रालय ने कहा कि ‘रिलीफ’ योजना के माध्यम से सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स व्यवधानों के तत्काल प्रभाव को कम करना, निर्यातकों का आत्मविश्वास बनाए रखना और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार की रक्षा करना है।

भाषा

सुमित अजय

अजय


लेखक के बारे में