सरकार का दावा, पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित

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सरकार का दावा, पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित

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  • Publish Date - July 3, 2026 / 08:42 PM IST,
    Updated On - July 3, 2026 / 08:42 PM IST

नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) सरकार ने देश के ई20 एथनॉल कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही विभिन्न भ्रामक जानकारियों को शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी किया।

सरकार ने कहा कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिले पेट्रोल को लेकर गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं, जो पूरी तरह से गलत हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 बिंदुओं में स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययन, वैश्विक अनुभव और नियामकीय सुरक्षा उपायों पर आधारित है। इस कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथनॉल मिलाया जाता है।

मंत्रालय ने उन दावों को खारिज कर दिया कि एक लीटर एथनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है और कहा कि एथनॉल बनाने के लिए सिर्फ़ वही अतिरिक्त चावल इस्तेमाल किया जाता है जो देश की खाद्य सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करने के बाद बचता है।

मंत्रालय ने कहा कि एथनॉल उत्पादन में प्रति लीटर मात्र करीब तीन–पांच लीटर प्रसंस्कृत पानी का उपयोग होता है और अब ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ प्रणाली का उपयोग कर पानी का पुनर्चक्रण किया जाता हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि अब एथनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मुख्य रूप से मक्का का उपयोग बढ़ा है। मक्का उत्पादन में धान की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है और इसे प्रोत्साहित भी किया जा रहा है।

वाहनों पर प्रभाव को लेकर मंत्रालय ने कहा कि भारतीय वाहन अनुसंधान संघ (एआरएआई) ने लगभग 40,000 किलोमीटर (कारों पर) और 20,000 किलोमीटर (दो-पहिया वाहनों) पर परीक्षण किए, जिसमें वाहन के प्रदर्शन या ईंधन दक्षता पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पाया गया। केवल माइलेज में कुछ हद तक बदलाव देखा गया।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका, ब्राज़ील, कनाडा, जापान और कई यूरोपीय देशों में लंबे समय से एथनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग हो रहा है।

मंत्रालय ने इंजन क्षति या वारंटी खत्म होने जैसे दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि वाहन विनिर्माता और बीमा कंपनियां स्पष्ट कर चुकी हैं कि ई20 के लिए निर्मित वाहनों की वारंटी और बीमा वैध रहते हैं।

मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को भी गलत बताया जिसमें कहा गया था कि ई20 ईंधन से चींटियां और मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं।

अंत में सरकार ने कहा कि ई20 कार्यक्रम को लेकर उच्चतम न्यायालय में चर्चा अनुबंध संबंधी मामलों से जुड़ी थी, न कि इस नीति की वैज्ञानिक उपयोगिता पर सवाल से।

ई20 ईंधन से इंजन खराब होने या वाहन के पुर्जों में जंग लगने के आरोपों पर सरकार ने कहा कि एआरएआई ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के साथ मिलकर अध्ययन किया है।

मंत्रालय ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि ई20 से गाड़ियों के ईंधन टैंक में पानी जा सकता है।

इसी तरह, पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाए जाने का दावा करने वाले वायरल वीडियो को भी मनगढ़ंत बताया गया। सरकार ने कहा गया कि ईंधन एथनॉल औद्योगिक प्रक्रियाओं से बनाया जाता है।

भाषा यासिर अजय

अजय