नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) सरकार ने ई-रिक्शा को दूर से ही बंद कर देने के मामले में तीन चीनी मोबाइल ऐप बैट-बीएमएस, लॉसिजी और एपॉक-आई-आयन को ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
यह कदम सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो सामने आने के बाद उठाया गया है। इन वीडियो में बैट-बीएमएस ऐप के जरिये चलते हुए ई-रिक्शा को दूर रहकर बंद करते हुए दिखाया गया था। वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट से जुड़े वाहनों में साइबर सुरक्षा खामियों को लेकर चिंता बढ़ गई।
सूत्रों ने कहा कि इन ऐप का दुरुपयोग बैटरी से चलने वाले वाहनों को दूर से निष्क्रिय करने के लिए किया जा रहा था। इसी आधार पर इन्हें ऐप स्टोर से हटाने का निर्देश दिया गया है।
सरकार ने यह भी कहा है कि इस तरह के फीचर वाले किसी अन्य ऐप की पहचान होने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ऐप स्टोर संचालकों के साथ भी संपर्क में है ताकि ऐसे एप्लिकेशन के वितरण को रोका जा सके, जो साइबर सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
बैट-बीएमएस एक ब्लूटूथ-आधारित बैटरी प्रबंधन प्रणाली (बीएमएस) ऐप है, जिसे चीन की कंपनी शेन्जेन ग्रीनर्जी टेक्नोलॉजी ने विकसित किया है। यह ऐप बैटरी के चार्ज, वोल्टेज, करंट और तापमान जैसे मानकों की निगरानी और नियंत्रण की सुविधा देता है।
लॉसिजी और एपॉक-आई-आयन ऐप भी अन्य कंपनियों की ब्लूटूथ-सक्षम लिथियम बैटरियों के साथ उपयोग होने वाले इसी तरह के बीएमएस ऐप हैं।
हालांकि, कम लागत वाले ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाले कुछ बीएमएस में पर्याप्त प्रमाणीकरण व्यवस्था नहीं होने से ब्लूटूथ की सीमा (करीब 15 मीटर) के भीतर कोई भी व्यक्ति बैटरी से कनेक्ट होकर उसे बंद कर सकता था।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ लोग ई-रिक्शा के पास जाकर ब्लूटूथ के जरिये बैटरी से कनेक्ट होते और उसकी डिस्चार्ज सप्लाई बंद कर देते थे, जिससे वाहन बीच रास्ते में रुक जाता था। कुछ मामलों में यह आरोप भी लगा कि बाद में वही लोग पैसे लेकर वाहन को दोबारा चालू करने की पेशकश करते थे।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सचिव एस कृष्णन ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ऐप स्टोर को जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए और सरकार इस मामले को उनके साथ उठाएगी, ताकि संभावित रूप से हानिकारक ऐप उपलब्ध न रहें।
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब देश में डिजिटल मंचों और कनेक्टेड तकनीकों की निगरानी बढ़ाई जा रही है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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