सरकार ने घरेलू बाजार में बिक्री के लिए कुछ एसईजेड इकाइयों को सीमित शुल्क छूट प्रदान की

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सरकार ने घरेलू बाजार में बिक्री के लिए कुछ एसईजेड इकाइयों को सीमित शुल्क छूट प्रदान की

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  • Publish Date - April 1, 2026 / 03:38 PM IST,
    Updated On - April 1, 2026 / 03:38 PM IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) सरकार ने वैश्विक मांग में कमजोरी से प्रभावित विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) की विनिर्माण इकाइयों को घरेलू बाजार में अपना माल बेचने में मदद करने के लिए एक वर्ष के लिए सीमित शुल्क रियायतों की घोषणा की है।

यह छूट एक अप्रैल से प्रभावी होगी और 31 मार्च, 2027 तक वैध रहेगी।

राजस्व विभाग की अधिसूचना के अनुसार, विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में विनिर्मित और घरेलू बाजार में बेचे जाने वाले सामान पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) में थोड़ी कमी आएगी। कुछ मामलों में कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एआईडीसी) में भी कमी की जाएगी। यह लाभ रसायनों और उर्वरकों से लेकर वस्त्र, जूते एवं मशीनरी तक, उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर लागू होगा।

यह छूट हालांकि केवल उन्हीं इकाइयों को मिलेगी जिन्होंने 31 मार्च, 2025 या उससे पहले वस्तुओं का उत्पादन शुरू कर दिया था। राजस्व विभाग ने 31 मार्च की अधिसूचना में यह जानकारी दी है।

इसमें कहा गया, ‘‘ यह अधिसूचना एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगी।’’

इकाइयों को हालांकि यह भी साबित करना होगा कि जिन वस्तुओं पर इस छूट अधिसूचना के तहत लाभ का दावा किया गया है, वे निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करती हैं। साथ ही जिन वस्तुओं के लिए इस अधिसूचना के तहत छूट का दावा किया जाएगा वे एसईजेड की इकाई द्वारा विनिर्मित हों और उनमें कम से कम 20 प्रतिशत मूल्य संवर्धन हुआ हो।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 का बजट पेश करते हुए एक एकमुश्त विशेष उपाय का प्रस्ताव किया था, ताकि एसईजेड की पात्र विनिर्माण इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र (डीटीए) में रियायती शुल्क दरों पर बिक्री की सुविधा मिल सके। यह प्रस्ताव वैश्विक व्यापार में व्यवधान के कारण एसईजेड की विनिर्माण इकाइयों की क्षमता उपयोग से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए लाया गया था।

उन्होंने कहा था कि ऐसी बिक्री की मात्रा उनके निर्यात के एक निर्धारित अनुपात तक सीमित रहेगी।

यह इन क्षेत्रों की लंबे समय से मांग रही थी, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण वे अपने अतिरिक्त उत्पादन का निर्यात बढ़ाने में सक्षम नहीं थे। एसईजेड की इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र (डीटीए या घरेलू बाजार) में अपने उत्पाद बेचने की अनुमति है लेकिन इसके लिए उन्हें आयात शुल्क का भुगतान करना होता है।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि सीमा शुल्क को युक्तिसंगत बनाया गया है। कुछ वस्तुओं पर वर्तमान में 7.5 प्रतिशत की दर से सीमा शुल्क लग रहा है अब उन पर 6.5 प्रतिशत की दर से शुल्क लगेगा। वहीं जिन पर 10 प्रतिशत की दर से शुल्क लग रहा है, उन पर नौ प्रतिशत की दर से शुल्क लगेगा। अधिसूचित वस्तुओं पर वर्तमान में 12.5 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की दर से शुल्क लग रहा है, उन पर 10 प्रतिशत की दर से शुल्क लगेगा।

इसके अतिरिक्त, अधिसूचित उत्पादों पर वर्तमान में 20 प्रतिशत की दर से शुल्क लग रहा है, अब उन पर 12.5 प्रतिशत की दर से शुल्क लगेगा। वहीं 20-30 प्रतिशत की सीमा में आने वाली निर्दिष्ट वस्तुओं पर अब 15 प्रतिशत की दर से शुल्क लगेगा और 30-40 प्रतिशत की सीमा में आने वाली वस्तुओं पर 20 प्रतिशत की दर से शुल्क लगेगा।

मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘‘वैश्विक व्यापार व्यवधानों के कारण एसईजेड में विनिर्माण इकाइयों को हो रही समस्याओं के समाधान के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा के अनुपालन में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने आज एक विशेष एकमुश्त राहत उपाय पेश किया है, ताकि एसईजेड की पात्र विनिर्माण इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र में रियायती शुल्क दरों पर बिक्री करने में सुविधा मिल सके।’’

इसमें कहा गया कि एसईजेड इकाइयां निर्यात ध्यान देती रहेंगी। वहीं पात्र एसईजेड इकाइयों द्वारा रियायती दरों पर बिक्री पिछले तीन वित्त वर्षों में से किसी एक वर्ष में हुए निर्यात के सर्वाधिक वार्षिक एफओबी (फ्री ऑन बोर्ड) मूल्य के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

इस फैसले पर आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि यह योजना कड़ी शर्तों के साथ आई है।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि पेट्रोल और डीजल को बाहर रखने से नीति कमजोर हो जाती है, खासकर रिफाइनरी से जुड़े एसईजेड के लिए।

ग्रांट थॉर्नटन भारत के भागीदार कृष्ण अरोड़ा ने कहा कि रियायती शुल्क विभिन्न क्षेत्रों में 6.5 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत के बीच है। इसमें मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एआईडीसी) दोनों में कमी शामिल है जो उत्पाद के अनुसार अलग-अलग है।

उन्होंने कहा, ‘‘ फिलहाल यह लाभ 2026-27 के लिए है लेकिन अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए इसे एक वर्ष या उससे अधिक समय के लिए बढ़ाने पर पुनर्विचार किया जा सकता है।’’

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक फरवरी को कहा था कि कई इकाइयों के पास अतिरिक्त क्षमता है और यह घोषणा उन्हें रियायती शुल्क पर घरेलू बाजार में बिक्री करने में मदद करेगी, जिससे आयात कम होगा।

एसईजेड में काम करने वाली कंपनियों को कच्चे माल और कलपुर्जों का शुल्क-मुक्त आयात करने की अनुमति होती है लेकिन इस शर्त के साथ कि उनसे तैयार वस्तुएं भारत से बाहर निर्यात की जाएंगी। हालांकि, वे लागू शुल्क का भुगतान कर घरेलू बाजार में भी बिक्री कर सकती हैं।

इन क्षेत्रों से कुल निर्यात 2024-25 में 7.37 प्रतिशत बढ़कर 172.27 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। देश में 276 चालू एसईजेड हैं जिनमें 6,279 इकाइयां कार्यरत हैं।

भाषा निहारिका निहारिका अजय

अजय