Gwalior High Court News / Image Source : FILE
ग्वालियर : Madhya Pradesh High Court की ग्वालियर बेंच ने एक कथित झूठे दुष्कर्म मामले में सख्त रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी डॉ. संतोष यादव और तत्कालीन विवेचना अधिकारी एसआई सुरुचि शिवहरे और एक फर्जी फरियादिया को नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न आप तीनों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए और पीड़ित को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया जाए? नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर मांगा गया है।
दरअसल मामला Amritsar के स्वर्ण व्यवसायी सिमरनजीत सिंह और Gwalior के राजीव सक्सेना का है। Gwalior High Court News फर्जी फरियादिया की शिकायत पर पुलिस ने वेतन और व्यापारिक लेन-देन के विवाद को रेप और छेड़छाड़ की घिनौनी साजिश में बदल दिया। 26 जून 2021 को थाना विश्वविद्यालय में सिमरनजीत और राजीव के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। विवेचना अधिकारी एसआई सुरुचि शिवहरे ने तत्कालीन टीआई डॉ. संतोष यादव के संरक्षण में बिना निष्पक्ष जांच किए आरोपियों को जेल भेज दिया। जबकि निचली अदालत ने इस मामले में अपने फैसले में स्पष्ट लिखा कि यह पूर्णतः कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। फरियादिया ने पुलिस के साथ मिलकर झूठा मामला रचा ताकि पैसों की वसूली की जा सके। आरोपियों को बरी तो कर दिया गया, लेकिन दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई एक्शन नहीं हुआ।
इसी के खिलाफ सिमरनजीत ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ग्वालियर हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सीधे तौर पर वर्तमान में पुरानी छावनी थाना टीआई डॉ. संतोष यादव, वर्तमान में पीटीएस तिघरा में पदस्थ एसआई सुरुचि शिवहरे और फरियादिया को पक्षकार बनाया है। कोर्ट ने उन्हें 4 सप्ताह का समय दिया। वर्दी की आड़ में निर्दोषों की जिंदगी तबाह करने वालों को अब 50 लाख जैसी भारी-भरकम राशि अपनी जेब से भरनी पड़ सकती है।