जीएसटी संग्रह मार्च में करीब नौ प्रतिशत बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक

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जीएसटी संग्रह मार्च में करीब नौ प्रतिशत बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक

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  • Publish Date - April 1, 2026 / 04:38 PM IST,
    Updated On - April 1, 2026 / 04:38 PM IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में आयात के साथ-साथ घरेलू बिक्री एवं खरीद से प्राप्त राजस्व में वृद्धि के दम पर मार्च में करीब नौ प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह कर कटौती से पहले के स्तर दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। यह वित्त वर्ष 2025-26 में तीसरा सबसे अधिक मासिक संग्रह है।

सरकार द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू सकल राजस्व में 5.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 1.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वहीं आयात से प्राप्त राजस्व में 17.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 53,861 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

मार्च, 2025 में सकल जीएसटी संग्रह 1.83 लाख करोड़ रुपये था।

वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) में मार्च, 2026 में तीसरा सबसे अधिक संग्रह दर्ज किया गया। इससे पहले अप्रैल, 2025 में 2.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अब तक का सबसे अधिक जीएसटी राजस्व दर्ज किया गया। वहीं मई में 2.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संग्रह हुआ था।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में सकल जीएसटी राजस्व 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।

जीएसटी की दरें करीब 375 वस्तुओं पर कम कर दी गई हैं जिससे सितंबर, 2025 से सामान सस्ता हो गया है। साथ ही, पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार कर स्लैब को पांच और 18 प्रतिशत की दो कर श्रेणी में तब्दील किया गया है। इसमें चुनिंदा अति विलासिता की वस्तुओं और तंबाकू उत्पादों के लिए सर्वाधिक 40 प्रतिशत का कर निर्धारित किया गया है।

कर कटौती लागू होने के पहले महीने में जीएसटी संग्रह में शुरू में गिरावट आई, नवंबर में राजस्व घटकर 1.70 लाख करोड़ रुपये रह गया। दिसंबर में यह बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये और जनवरी में 1.93 लाख करोड़ रुपये हो गया। फरवरी में यह 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के दौरान ‘रिफंड’ जारी करने की राशि 13.8 प्रतिशत बढ़कर 22,074 करोड़ रुपये हो गई।

‘रिफंड’ समायोजित करने के बाद शुद्ध जीएसटी राजस्व करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये रहा जो सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।

परामर्श कंपनी डेलॉयट इंडिया के साझेदार एम. एस. मणि ने कहा कि हालांकि ये संग्रह दर्शाते हैं कि उपभोग की भावना मजबूत बनी हुई है, लेकिन यह देखना दिलचस्प है कि सकल जीएसटी संग्रह में आठ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि आयात जीएसटी के मजबूत संग्रह से काफी हद तक प्रभावित हुई है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों में जहां संग्रह में मजबूत वृद्धि जारी है। वहीं हरियाणा, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में धीमी वृद्धि देखी जा रही है।

पेशेवर सेवा कंपनी ईवाई इंडिया के कर साझेदार सौरभ अग्रवाल ने कहा, ‘‘ अप्रैल में हम सतर्कतापूर्ण रुख की उम्मीद करते हैं। भू-राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव से उपभोग मांग में कमी आने के आसार हैं।

अग्रवाल ने कहा कि हालांकि पारंपरिक साल के अंत में होने वाली बिक्री एक रणनीतिक सुरक्षा प्रदान कर सकती है, लेकिन मध्यावधि दृष्टिकोण वैश्विक अस्थिरता के मुकाबले विनिर्माण गति को बनाए रखने के लिए निरंतर नीतिगत हस्तक्षेप को जरूरी बनाता है।

टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज के साझेदार विवेक जालान ने कहा कि जीएसटी संग्रह राजकोषीय स्थिरता को मजबूत करता है…भारत की कर प्रणाली सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विस्तार के साथ तालमेल बैठा रही है जिससे सरकारों एवं व्यवसायों दोनों को वृद्धि की स्थिरता पर भरोसा हो पाता है।

भाषा निहारिका अजय

अजय