लखनऊः Medicine Price Hike: आज से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत हो गई है और पहले दिन से ही आम आदमी को महंगाई का झटका लगा है। एक ओर जहां कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी के साथ कई नियमों में अहम बदलाव हुए हैं। वहीं दूसरी ओर 900 से अधिक दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में संशोधन किया गया है। मरीजों और उनके परिजनों को अब दवाइयों की खरीद के लिए 10 से 12 प्रतिशत अधिक पैसा देना होगा।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के आदेश के बाद बुखार, दर्द, संक्रमण, एनीमिया और पोषण संबंधी जरूरतों में उपयोग होने वाली दवाएं महंगी हुई है। दवा कारोबारियों के अनुसार, यह वृद्धि फार्मा कंपनियों द्वारा हर साल अप्रैल में की जाने वाली नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, जैसे ईरान, इराक या अमेरिका के युद्ध का इससे कोई संबंध नहीं है। जीएसटी में कटौती के बाद भी दवाओं की कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालेगी।
Medicine Price Hike: दवा बाजार में लगभग 80 प्रतिशत नया स्टॉक आ चुका है, जिस पर नई एमआरपी अंकित है। उदाहरण के तौर पर, पहले 80 रुपये की दवा अब 90 से 95 रुपये में मिल रही है, जबकि 100 रुपये वाली दवा 110 से 115 रुपये तक पहुंच गई है। थोक से लेकर खुदरा स्तर तक दवाओं की बिक्री अब नई कीमतों के अनुसार ही हो रही है। हालांकि, कुछ दुकानदार पुराने स्टॉक को कम कीमत पर बेच रहे हैं, लेकिन बाजार में नए स्टॉक की हिस्सेदारी अधिक होने के कारण इसका लाभ सीमित ही मिल रहा है।
थोक दवा कारोबारी राजीव सिंह ने बताया कि दामों में बढ़ोतरी पूरी तरह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका युद्ध जैसी बाहरी परिस्थितियों से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, कारोबारी सुनील राणा का कहना है कि कई कंपनियां जनवरी से ही नए रेट लागू कर चुकी थीं और अब अप्रैल में यह पूरी तरह प्रभावी हो गया है। जानकारी के अनुसार, कई फार्मा कंपनियों का नया स्टॉक अप्रैल के पहले सप्ताह में बाजार में पहुंच जाएगा, जिसके बाद दवाओं की बिक्री पूरी तरह नई एमआरपी के आधार पर ही होगी।
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