सरकार ने सेवा क्षेत्र के लिए एक सूचकांक लाने की शुरुआती रूपरेखा जारी की

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सरकार ने सेवा क्षेत्र के लिए एक सूचकांक लाने की शुरुआती रूपरेखा जारी की

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 08:02 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 08:02 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अर्थव्यवस्था के संगठित क्षेत्र के लिए सेवा उत्पादन सूचकांक (आईएसपी) तैयार करने के बारे में एक शुरुआती रूपरेखा जारी किया है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि फिलहाल सेवा क्षेत्र की अल्पकालिक गतिविधियों को मापने के लिए कोई आधिकारिक सेवा उत्पादन सूचकांक उपलब्ध नहीं है, जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था के आकलन में डेटा से जुड़ा एक बड़ा फासला बना हुआ है।

मंत्रालय के मुताबिक, सेवा क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का सबसे गतिशील और तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में आधे से अधिक योगदान देता है और बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित करता है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत संचालित राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) लंबे समय से आईएसपी तैयार करने की चुनौती से जूझ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) मौजूद है लेकिन सेवा क्षेत्र के लिए ऐसा कोई सूचकांक नहीं है।

मंत्रालय ने कहा कि हाल के वर्षों में डेटा उपलब्धता, डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग से सांख्यिकीय विश्लेषण की क्षमता बढ़ी है। खासकर एक जुलाई, 2017 से लागू माल एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) अब विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण डेटा स्रोत बनकर उभरा है।

इस प्रस्ताव के तहत, सेवा क्षेत्र की प्रगति पर नजर रखने के लिए एकीकृत जीएसटी आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा, जबकि व्यक्तिगत स्तर के डेटा की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी।

इस दिशा में आईएसपी पर मई, 2025 में एक तकनीकी सलाहकार समिति गठित की गई थी, जिसके 24 सदस्यों ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह शुरुआती रूपरेखा तैयार की है।

मंत्रालय ने बताया कि प्रस्तावित पद्धति अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम तौर-तरीकों के अनुरूप विकसित की गई है। इसमें सेवा क्षेत्र के 40 से अधिक उप-क्षेत्रों- जैसे थोक एवं खुदरा व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, बीमा, संचार, होटल-रेस्तरां, रियल एस्टेट, पेशेवर एवं तकनीकी सेवाएं, कला एवं मनोरंजन का विश्लेषण शामिल है।

मंत्रालय ने विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, केंद्र एवं राज्य सरकारों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों से पांच मई तक इस प्रस्ताव पर सुझाव आमंत्रित किए हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण