नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शिक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कनाडा को दोहरी-डिग्री व्यवस्था शुरू करने का सुझाव दिया है।
इसके साथ ही कनाडा की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे गोयल ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत-कनाडा संबंधों में ‘राजनीतिक पुनर्संतुलन’ का यह उपयुक्त समय है।
गोयल ने टोरंटो विश्वविद्यालय के मंक स्कूल ऑफ ग्लोबल अफेयर्स एंड पब्लिक पॉलिसी में अपने संबोधन में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों को ऐसे कार्यक्रमों पर तेजी से काम करना चाहिए, जिनमें छात्र एक साल कनाडा में पढ़ाई कर सकें और फिर भारत लौटकर देश के विकास में योगदान दें।
उन्होंने कनाडा के युवाओं को भारत आने और यहां हो रहे विकास कार्यों को करीब से देखने का भी आमंत्रण दिया।
दोहरी-डिग्री व्यवस्था के तहत दोनों देशों के विश्वविद्यालय मिलकर ऐसे पाठ्यक्रम चला सकते हैं, जिनमें छात्र आंशिक पढ़ाई भारत और आंशिक कनाडा में करें और उन्हें दोनों संस्थानों से मान्यता-प्राप्त डिग्री या प्रमाणपत्र मिले।
इस अवसर पर गोयल ने निवेश आकर्षित करने की अपील करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और आने वाले दो दशकों तक इस स्थिति को बनाए रखने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत की प्रति व्यक्ति आय को कम-से-कम 20,000 डॉलर तक पहुंचाने का है।
उन्होंने कहा कि भारत विनिर्माण और बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।
गोयल ने कहा, ‘करीब चार लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था अगर सात प्रतिशत के आसपास की वास्तविक वृद्धि दर और मौजूदा कीमतों पर नौ-10 प्रतिशत की वृद्धि दर बनाए रखती है, तो अगले 25 वर्षों में इसका आकार लगभग आठ गुना होकर 30 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है।’
उन्होंने कहा कि यह कोई अनुमान नहीं, बल्कि गणितीय गणना पर आधारित आकलन है।
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प्रेम रमण
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