मूंगफली तेल-तिलहन और सोयाबीन में गिरावट, बिनौला में सुधार

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मूंगफली तेल-तिलहन और सोयाबीन में गिरावट, बिनौला में सुधार

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  • Publish Date - April 17, 2026 / 09:22 PM IST,
    Updated On - April 17, 2026 / 09:22 PM IST

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) ऊंचे दाम पर लिवाली प्रभावित रहने के बीच देश के तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को मूंगफली तेल-तिलहन तथा पश्चिम एशिया में युद्धविराम की स्थिति के बीच आपूर्ति सुधारने की उम्मीद से सोयाबीन तेल कीमतों में गिरावट का रुख रहा।

बाजार सूत्रों के अनुसार वहीं मूंगफली, सूरजमुखी तेल के मंहगा होने के बीच सस्ते में मांग बढ़ने से बिनौला तेल के दाम में सुधार आया। सामान्य और सुस्त कामकाज के बीच सरसों तेल-तिलहन एवं सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल के दाम स्थिर बने रहे।

मलेशिया एक्सचेंज 3.30 बजे गिरावट के साथ बंद हुआ। जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में गिरावट जारी है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्धविराम की स्थिति के बीच कारोबारियों को खाद्यतेल आपूर्ति में सुधार आने की उम्मीद है जिसके कारण खाद्यतेल कीमतों पर दवाब बना हुआ है और कीमतें घट गई हैं। शिकॉगो एक्सचेंज में गिरावट रहने से भी सोयाबीन तेल कीमतों में नरमी रही। वहीं, ऊंचे दाम के कारण लिवाली प्रभावित होने से मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में भी गिरावट देखी गई।

उन्होंने कहा कि बाजार में सूरजमुखी और मूंगफली का दाम ऊंचा होने की वजह से सस्ते बिनौला तेल की मांग बढ़ गई है जिस वजह से बिनौला तेल के दाम में सुधार है। दूसरी ओर, उपलब्धता की कमी के बीच सोयाबीन तिलहन कीमतें स्थिर बनी रहीं।

सूत्रों ने कहा कि बाजार में आपूर्ति सुधरने की उम्मीदों के बीच सरसों तेल-तिलहन के दाम भी स्थिर रहे। अभी अन्य खाद्यतेलों के मुकाबले सरसों का थोक दाम सस्ता है और ऐसे में सटोरियों को दरकिनार करते हुए सरकार की ओर से खरीद करते हुए स्टॉक रखने की जरुरत है। यह बाजार में खाद्यतेल कीमतों में किसी अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव की स्थिति से निबटने में सरकार के लिए मददगार साबित होगा। कई बार अनुभव किया गया है कि स्टॉक होने के बावजूद भी सटोरिये सस्ते में लिवाली करने के बाद ऐन मौके पर दाम बढ़ाकर अधिक मुनाफा वसूलते हैं।

उन्होंने कहा कि इन सटोरियों के अनुमानों को नजरअंदाज करने की जरुरत है क्योंकि उनके अनुमान बाजार में अधिक आवक की घोषणा कर किसानों के माल सस्ते में हड़पने का होता है। ऐसा कोई अनुमान मोपा (सरसों तेल उत्पादक संघ) जैसे संबंधित तेल संगठनों की ओर से ही जारी होना ठीक है। बाजार में आवक के बारे में ऐसा कोई अनुमान व्यक्तिगत स्तर पर नहीं जारी होना चाहिये।

सूत्रों के अनुसार बाजार में सरसों तेल का थोक दाम बाकी खाद्य तेलों के मुकाबले सस्ता है लेकिन ग्राहकों का इसका लाभ मिल रहा है या नहीं इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

गर्मियों में हल्की मांग रहने के बावजूद सुस्त कामकाज के बीच पाम-पामोलीन तेल के दाम भी स्थिर रहे।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,875-6,900 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 7,000-7,475 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,700 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,640-2,940 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,390-2,490 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,390-2,535 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,900 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,100 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 15,300 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,150 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 13,950 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,775-5,825 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,425-5,500 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण