चंडीगढ़, 28 मार्च (भाषा) हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि रबी खरीद सत्र 2026-27 के दौरान फसलें बेचने के लिए मंडियों में आने वाले किसानों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।
सैनी यहां खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और फसल खरीद से जुड़ी अन्य एजेंसियों के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने रबी खरीद सत्र के लिए की गई व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की।
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि गेहूं की खरीद एक अप्रैल, 2026 से शुरू होगी, और भारत सरकार ने इस रबी खरीद सत्र के लिए 72 लाख टन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू हो गई है। इस साल, राज्य सरकार लगभग 13 लाख टन सरसों खरीदने की योजना बना रही है। इसमें से 25 प्रतिशत खरीद केंद्रीय एजेंसियों (नाफेड और एलसीसीएफ) के माध्यम से ‘मूल्य समर्थन योजना’ के तहत की जाएगी, जबकि शेष 75 प्रतिशत खरीद राज्य की एजेंसियों (हाफेड और हरियाणा राज्य भंडारण निगम द्वारा 50:50 के अनुपात में) द्वारा की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि गेहूं की खरीद के लिए राज्य में 416 मंडियां निर्धारित की गई हैं। सरसों के लिए 112, जौ के लिए 25, चने के लिए 11 और मसूर के लिए 7 मंडियों की पहचान की गई है।
उन्होंने कहा कि रबी फसलों की सुचारू और पारदर्शी खरीद सुनिश्चित करने के लिए राज्य द्वारा संचालित विभिन्न पोर्टल में कई सुधार किए गए हैं।
मंडियों में उपज लाने वाले सभी किसानों के लिए अपने वाहनों पर वाहन नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस साल, खरीद कार्यों के लिए सभी मंडियों को ‘जियो-फेंस’ किया गया है। आने वाले किसानों के लिए सभी गेट पास ‘ई-खरीद’ मोबाइल ऐप के माध्यम से जारी किए जाएंगे।
इसी तरह, बोली प्रक्रिया के दौरान, ‘‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’’ पोर्टल पर पंजीकृत किसान, या उनके तीन अधिकृत प्रतिनिधियों में से किसी एक का बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा।
हरियाणा की सभी मंडियों में बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। सभी गेट पास और खरीद से संबंधित गतिविधियां मोबाइल ऐप के माध्यम से ही संचालित की जाएंगी।
भाषा राजेश राजेश अविनाश
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