आवक कम होने, मांग बढ़ने से तेल-तिलहन के दाम में मजबूती

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आवक कम होने, मांग बढ़ने से तेल-तिलहन के दाम में मजबूती

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  • Publish Date - March 28, 2026 / 09:14 PM IST,
    Updated On - March 28, 2026 / 09:14 PM IST

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) खाद्यतेलों की आवक कम होने तथा शादी-विवाह के मौसम में मांग बढ़ने के कारण शनिवार को सभी तेल-तिलहनों में सुधार दर्ज हुआ।

बाजार सूत्रों ने कहा कि 31 मार्च के नजदीक आने के कारण करोबारी लेखाबंदी के काम में जुटे हैं जिससे कारोबारी गतिविधियों में अपेक्षाकृम कमी आई है। लेकिन शादी विवाह के मांग है।

इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। पश्चिम एशिया युद्ध जारी रहने के बीच आयातित खाद्यतेलों की आवाजाही भी कम है। इन सभी परिस्थितियों ने खाद्यतेलों के दाम की तेजी पर अपना असर डाला है।

उन्होंने कहा कि विदेशों खाद्यतेलों के दाम मजबूत हुए हैं और इस तेजी के बीच देशी तेल-तिलहन ही फिलहाल परिस्थितियों को संभाल रहे हैं। मौजूदा स्थिति हमारे लिए सबक है कि देशी तेल-तिलहनों का उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि आयात पर निर्भरता को कम से कम किया जा सके।

मौजूदा स्थिति में सरसों, सोयाबीन, कपास नरमा (नरमा से मिलने वाला बिनौला) जैसे फसल ही स्थिति को काबू में रखे हैं। लेकिन लगभग 60 प्रतिशत की आयात पर निर्भरता को देखते हुए देश में खाद्य तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी है कि इनके बाजार को विकसित करने की ओर काफी गंभीरता से ध्यान दिया जाये।

सूत्रों ने कहा कि मंडियों में स्टॉकिस्टों के सरसों किसानों को हतोत्साहि करने की तमाम कोशिशों के बावजूद किसान रोक-रोक कर बाजार में अपनी ऊपज को ला रहे हैं। आवक कम है और सरसों के सोयाबीन तेल से पहली बार दाम नीचा रहने से सरसों की मांग भी है। एक और तथ्य है कि सरसों का प्रसंस्करण करने की जरुरत भी नहीं होती और इसे सीधे खाया जा सकता है। इस कारण भी इसकी मांग बढ़ी है। इन तमाम पहलुओं की वजह से सरसों तेल-तिलहन के दाम में सुधार आया।

उन्होंने कहा कि मूंगफली तेल के दाम ऊंचे हैं और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ताओं के बीच इसकी खपत ज्यादा होती है। मूंगफली के मुकाबले बिनौला तेल लगभग 27 रुपये किलो सस्ता है और इस वजह से ज्यादातर उपभोक्ता मूंगफली की जगह बिनौला तेल का उपयोग कर रहे हैं। इन स्थितियों के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।

सूत्रों ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से सोयाबीन डीगम तेल का आयात मंहगा हुआ है। इसके अलावा सरकार की ओर से महाराष्ट्र में सोयाबीन की जो बिकवाली हो रही थी उसे कुछ दिनों पहले रोक दिया गया है जिससे किसानों को भी फायदा है और सोयाबीन का स्टॉक जरुरत के समय काम आयेगा। सोयाबीन की बिकवाली बंद होने से सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम भी मजबूत रहे।

उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पाम-पामोलीन की मांग बढ़ी है। दूसरा पाम-पामोलीन का दाम सोयाबीन से 10 रुपये किलो सस्ता बैठता है जिससे इनके दाम में सुधार आया।

सूत्रों ने कहा कि मांग बढ़ने और कपास नरमा की आवक घटकर 42 हतार गांठ रह जाने के कारण बिनौला तेल के दाम में सुधार आया।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,025-7,050 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 7,250-7,725 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 17,550 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,770-3,070 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,825 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,460-2,560 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,460-2,605 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 16,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 13,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,625 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 14,850 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,425 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 14,375 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,725-5,775 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,325-5,475 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण