नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) एचसीएलटेक की चेयरपर्सन रोशनी नाडर मल्होत्रा संपित्त सृजन के मामले में सबसे आगे हैं। वहीं, हिंदुस्तान यूनिलीवर की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक प्रिया नायर ने ‘पेशेवर सीईओ’ श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया जो 5,06,600 करोड़ रुपये मूल्य वाली कंपनी का नेतृत्व कर रही हैं। ‘कैंडेयर हुरुन इंडिया महिला नेतृत्व सूची’ में यह कहा गया है।
इस साल की सूची में 117 महिलाओं को शामिल किया गया है, जबकि 2025 में यह संख्या 97 थी। इस तरह सूची में शामिल महिलाओं की संख्या में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
पिछले साल नौ श्रेणियों वाली इस सूची का दायरा बढ़ाकर 2026 में 12 श्रेणियों तक कर दिया गया है, ताकि महिला नेतृत्व के व्यापक स्वरूप को शामिल किया जा सके।
सूची में शामिल सभी महिलाओं से जुड़ी कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन 39 लाख करोड़ रुपये है, जो फिनलैंड के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से भी अधिक है। सूची में शामिल महिलाओं की औसत आयु 48 वर्ष है और उनकी आयु 19 से 86 वर्ष के बीच है।
बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार-शॉ और नायका की संस्थापक फाल्गुनी नायर सूची में शामिल प्रमुख नामों में हैं।
अपोलो हॉस्पिटल्स की प्रीता रेड्डी (68) और सुनीता रेड्डी (67) ने संयुक्त रूप से ‘अनुभवी’ श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन 1,21,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
रीन्यू पावर की सह-संस्थापक और चेयरपर्सन (सस्टेनेबिलिटी) वैशाली निगम सिन्हा (56) ने ‘न्यू इकॉनमी’ श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उनकी कंपनी का मूल्यांकन 22,230 करोड़ रुपये है।
महज 19 वर्ष की पैरा तीरंदाज शीतल देवी इस सूची में शामिल सबसे कम उम्र की महिला हैं, जबकि 86 वर्षीय उद्यमी रजनी बेक्टर सबसे वरिष्ठ सम्मानित महिला हैं।
हुरुन इंडिया के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने कहा, “जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था और समाज अधिक विविध हो रहे हैं, हमारा लक्ष्य उन क्षेत्रों, उभरते क्षेत्रों और कम चर्चित उपलब्धियों तक पहुंचना है, जहां अगली पीढ़ी की महिलाएं नेतृत्व स्तर पर पहले से काम कर रही हैं और पहचान मिलने का इंतजार कर रही हैं।”
कैंडेयर के प्रबंध निदेशक संजय रघुरामन ने कहा, “…इस सूची के दूसरे संस्करण में विभिन्न क्षेत्रों में नए मानक स्थापित करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया है। हुरुन इंडिया के साथ मिलकर हम उम्मीद करते हैं कि यह सम्मान आगे और प्रतिष्ठित होगा, प्रभावशाली कहानियों को सामने लाएगा और उन असाधारण महिलाओं का सम्मान करेगा, जिनकी उपलब्धियां आज के भारत को आकार दे रही हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए नेतृत्व की स्थायी विरासत छोड़ रही हैं।”
भाषा रमण अजय
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