नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) भौतिक और डिजिटल (फिजिटल) दोनों तरह के वित्तीय माध्यमों तक पहुंच वाले परिवारों के लिए वित्तीय ‘नतीजे’ केवल डिजिटल माध्यमों पर निर्भर रहने वाले परिवारों की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई देते हैं।
पीडब्लूसी इंडिया द्वारा द्वारा रिसर्च फाउंडेशन के साथ साझेदारी में किए गए एक सर्वेक्षण में यह बात कही गई।
सर्वेक्षण में कहा गया कि एक दशक से अधिक समय तक भारत में वित्तीय समावेशन की सफलता को खोले गए बैंक खातों और जारी किए गए कार्डों की संख्या से मापा जाता रहा है। लेकिन इसके अगले अध्याय को अलग तरह से मापा जाना चाहिए।
‘रिथिंकिंग फाइनेंशियल हेल्थ फॉर मीनिंगफुल इम्पैक्ट’ शीर्षक वाले इस सर्वेक्षण में सात राज्यों के 18 जिलों के 4,000 परिवारों को शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण भारत के परिवारों में बहु-सेवा डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अपनाने की दर सबसे अधिक 70 प्रतिशत से अधिक है। वहीं, पूर्वी भारत के 37 प्रतिशत परिवारों ने कभी वित्तीय सलाह नहीं ली है, जबकि अनौपचारिक ऋण में 78 प्रतिशत ऋण एक ही स्रोत से लिए जाते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘दक्षिण भारत में वित्तीय सेवाओं का विस्तार नेटवर्क आधारित है। यहां 44 प्रतिशत वित्तीय सलाह तीसरे पक्ष के प्रदाताओं और 40 प्रतिशत सामाजिक नेटवर्क से मिलती है, जबकि औपचारिक वित्तीय सेवा प्रदाताओं (एफएसपी) की हिस्सेदारी केवल 13 प्रतिशत है। डिजिटल वित्तीय सेवाओं की बहु-सेवा स्वीकार्यता 70 प्रतिशत से अधिक है।’’
देश के पश्चिमी हिस्से के बारे में सर्वेक्षण में पाया गया कि वहां डिजिटल वित्तीय सेवाओं (डीएफएस) की स्वीकार्यता 95 प्रतिशत से अधिक है, फिर भी औपचारिक ऋण का उपयोग करने वाले 65 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें किसी न किसी मोड़ पर कर्ज देने से मना किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि उत्तर भारत में लोग स्वयं को वित्तीय सेवाओं से दूर रखते हैं और ग्रामीण बुनियादी ढांचे की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत में वित्तीय सेवाओं तक पहुंच अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। करीब 40 प्रतिशत लोगों के पास पैदल दूरी के भीतर कोई भौतिक वित्तीय सेवा केंद्र उपलब्ध नहीं है। वहीं, नए ग्राहकों में वित्तीय सेवाओं को लेकर भरोसे की कमी के कारण वे केवल खाता खोलने या सेवा उपलब्ध होने तक सीमित रह जाते हैं और उनका वास्तविक उपयोग कम हो पाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सभी क्षेत्रों की तुलना में उत्तर भारत में डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अपनाने की दर सबसे कम 75.67 प्रतिशत है।
भाषा योगेश अजय
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