नई दिल्ली। जिन ट्रेडरों या डीलरों ने अभी तक जीएसटी में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की है, वे परेशान न हो। 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद वे 15 अंकों वाले प्रोविजनल आईडी से भी कारोबार कर सकते है। शुरू के कुछ महीनों तक यही जीएसटी आइडेटिफिकेशन नंबर का काम करेगा। राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने यह जानकारी दी। गौरतलब है कि एक्साइज, सर्विस टैक्स और वैट के 80.91 लाख असेसी में से अभी तक 65.6 लाख यानी 81 प्रतिशत ही जीएसटी में माइग्रेट हो पाए है। इनमें भी 13 लाख ने अभी तक दूसरे चरण का वेरिफिकेशन नहीं किया है। जब कोई कारोबारी या कंपनी जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करती है तो पहले उसे प्रोविजनल नंबर मिलता है। इसके बाद उसे जीएसटीएन पोर्टल पर लाॅगइन कर जरूरी जानकारियां देकर उसे वेरिफाई करना पड़ता है। तब रजिस्ट्रेशन पूरा होता है।