मुंबई, 19 जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने महीने की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के दौरान आने वाले समय में मुद्रास्फीति के व्यापक फैलाव को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बतायी।
मल्होत्रा ने नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रखने के पक्ष में मतदान करते हुए यह बात कही थी।
आरबीआई ने तीन से पांच जून के बीच हुई एमपीसी बैठक की कार्यवाही का ब्योरा शुक्रवार को जारी किया। समिति के अन्य पांचों सदस्यों ने भी नीतिगत रेपो दर को अपरिवर्तित रखने के पक्ष में मतदान किया था।
एमपीसी ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया था।
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण वृद्धि और महंगाई पर बढ़ते जोखिमों के बीच विदेशी पूंजी आकर्षित करने और रुपये को समर्थन देने के लिए कई कदमों की घोषणा की गई थी।
ब्योरे के मुताबिक, एमपीसी बैठक के दौरान मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई और वृद्धि के अनुमानों को लेकर अनिश्चितता अधिक है। इसके पीछे पश्चिम एशिया संघर्ष की अवधि और उससे आपूर्ति शृंखला पर पड़ने वाले असर, मानसून की तीव्रता और भौगोलिक फैलाव तथा इसका ऊर्जा, खाद्य एवं अन्य जिंसों की कीमतों पर प्रभाव जैसे कारक शामिल हैं।
मल्होत्रा ने कहा था, “मैं प्रतीक्षा और निगरानी का रुख अपनाना पसंद करूंगा। इसके हिसाब से मैं नीतिगत दर को यथावत रखने और तटस्थ रुख बनाए रखने के पक्ष में मतदान करता हूं।”
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति दर के 5.1 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
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