Vande Bharat: छात्रों के सवाल, ‘स्याही कांड’ पर बवाल! AISA चीफ नेहा बोरा पर युवक ने फेंकी स्याही, JPSC आंदोलन के दौरान क्यों हुआ बवाल?

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JPSC Protest News: झारखंड की राजधानी रांची में विधानसभा मार्च के दौरान एक युवक ने AISA की प्रेसिडेंट नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी।

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  • Publish Date - August 7, 2026 / 11:56 PM IST,
    Updated On - August 7, 2026 / 11:58 PM IST

JPSC Protest News/Image Credit: File Image

HIGHLIGHTS
  • झारखंड की राजधानी रांची में AISA के विधानसभा मार्च के दौराम हंगामा हो गया।
  • विधानसभा मार्च के दौरान एक युवक ने AISA की प्रेसिडेंट नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी।
  • छात्रों ने युवक की जमकर पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया।

JPSC Protest News: नई दिल्ली: झारखंड की राजधानी रांची में AISA के विधानसभा मार्च के दौराम हंगामा हो गया। AISA की प्रेसिडेंट नेहा बोरा विधानसभा मार्च के बीच छात्रों को संबोधित कर रही थी। इसी दौरान एक युवक ने उन पर काली स्याही फेंक दी। छात्रों ने उसकी जमकर पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया।

झारखंड में 14वीं JPSC रद्द करने की मांग के समर्थन में शुक्रवार को AISA ने विधानसभा घेराव का आव्हान किया था। (JPSC Protest News) नेहा बोरा इसकी अगुवाई करने रांची पहुंची थी और अनशन पर बैठे छात्रों से भी मिली थी और छात्रों को संबोधित भी किया था लेकिन उन्हें छात्रों ने ही मंच से नीचे उतार दिया। छात्रों का कहना था कि ये आंदोलन पूरी तरह गैर राजनीतिक है इसे किसी को हाइजैक करने नहीं दिया जाएगा। AISA के विधानसभा मार्च से एक दिन पहले ही छात्रों ने ये साफ कर दिया था कि AISA के मार्च से उनका कोई लेना देना नहीं है।

JPSC Protest News:  उधर अनशन पर बैठे छात्रों को मानने की झारखंड सरकार की कोशिशे भी जारी है। शुक्रवार दोपहर एक बार फिर कलेक्टर और SDM प्रदर्शन स्थल पहुंचे और सरकार से बातचीत के लिए 5 नाम मांगे और साफ कर दिया कि बातचीत सिर्फ छात्रों से ही होगी।

छात्रों के आंदोलन को लेकर सियासत भी तेज है विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सदन के बाहर NDA विधायकों ने प्रदर्शन किया और सोरेन सरकार से इस्तीफे की मांग की। (JPSC Protest News) उधर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी 13 अगस्त से छात्रों की मांगों के समर्थन में आमरण अनशन की चेतावनी दी।

JPSC Protest News:  सियासत के शोर के बीच छात्रों ने एक बात साफ कर दी है। उनका आंदोलन किसी पार्टी का मंच नहीं है बल्कि अपने हक और भविष्य की लड़ाई है। किसी को भी इसे हाईजैक करने नहीं दिया जाएगी। यही वजह है कि हेमंत सोरेन सरकार इसके गैर राजनीतिक स्वरूप के चलते छात्रों की मांगों की अनदेखी नहीं कर पा रही और सुलह की कोशिशों में जुटी है।

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