Income Tax Return File: क्या जीरो टैक्स वाले को भी भरना पड़ेगा ITR? Form-16 से जुड़ा ऐसा नियम, जिसे नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

Income Tax Return File: अगर फॉर्म-16 में टैक्स देनदारी शून्य है तब भी कुछ लोगों के लिए ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है। सेक्शन 87A की छूट, ITR फाइलिंग नियम 2026 और आय की स्थिति के आधार पर यह तय होता है। समय पर रिटर्न नहीं भरने से भविष्य में कई वित्तीय और कानूनी दिक्कतें आ सकती है।

Income Tax Return File: क्या जीरो टैक्स वाले को भी भरना पड़ेगा ITR? Form-16 से जुड़ा ऐसा नियम, जिसे नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

(Income Tax Return File/ Image Credit: AI-generated)

Modified Date: July 2, 2026 / 03:09 pm IST
Published Date: July 2, 2026 2:51 pm IST
HIGHLIGHTS
  • Form-16 में 0 टैक्स होने पर भी ITR जरूरी हो सकता है।
  • सेक्शन 87A की छूट से टैक्स शून्य हो सकता है।
  • बड़े वित्तीय लेन-देन पर ITR फाइल करना जरूरी हो सकता है।

नई दिल्ली: Income Tax Return File: यदि आप नौकरीपेशा है और कंपनी से मिला Form-16 बताता है कि आपकी टैक्स देनदारी शून्य है तो यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब ITR यानी इनकम टैक्स रिटर्न भरने की जरूरत नही है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार कई ऐसे मामले हैं जिनमें टैक्स न होने के बावजूद रिटर्न दाखिल करना जरूरी होता है। समय पर ITR नहीं भरने पर नोटिस, लेट फीस या अन्य कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

सेक्शन 87A की छूट कैसे काम करती है?

कई लोगों की टैक्स देनदारी सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स छूट के कारण शून्य हो जाती है। मौजूदा नियमों के अनुसार पुराने टैक्स सिस्टम में 7 लाख रुपये तक और नए टैक्स सिस्टम में 12 लाख रुपये तक की आय पर तय शर्तें पूरी होने पर टैक्स नहीं देना पड़ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ITR फाइल करने की जरूरत खत्म हो जाती है। ITR भरने का नियम केवल टैक्स की राशि पर नहीं बल्कि आपकी कुल आय और अन्य वित्तीय गतिविधियों पर भी आधारित होता है।

किन लोगों के लिए ITR भरना जरूरी है?

अगर आपकी आय बेसिक छूट सीमा से अधिक है या आपने वित्त वर्ष के दौरान बड़े वित्तीय लेन-देन किए हैं तो ITR फाइल करना जरूरी हो सकता है। इसमें बैंक खाते में बड़ी रकम जमा करना, विदेश यात्रा पर अधिक खर्च करना, विदेशी संपत्ति या शेयर रखना, विदेशी बैंक खाते से जुड़ाव या अन्य रिपोर्टेबल ट्रांजैक्शन शामिल हैं। इसके अलावा अगर आपकी आय में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन, क्रिप्टो या अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से कमाई शामिल है तो उन पर अलग टैक्स नियम लागू हो सकते हैं।

ITR फाइल करने के फायदे क्या हैं?

ITR सिर्फ टैक्स जमा करने का दस्तावेज नहीं है बल्कि यह आपकी आय का आधिकारिक रिकॉर्ड भी होता है। बैंक से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लेने, विदेश का वीजा बनवाने और कई वित्तीय कामों में ITR की जरूरत पड़ती है। यदि आपके वेतन से ज्यादा TDS कट गया है तो उसका रिफंड भी ITR फाइल करने पर ही मिलता है। यदि आपको किसी निवेश में पूंजीगत नुकसान हुआ है तो भविष्य में उसका लाभ लेने के लिए भी समय पर ITR दाखिल करना जरूरी होता है।

रिटर्न भरने से पहले इन बातों का रखें ख्याल

टैक्स विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ITR भरने से पहले अपना AIS यानी Annual Information Statement और Form 26AS जरूर जांचें। इससे आपके सभी बड़े वित्तीय लेन-देन की सही जानकारी मिल जाती है। अगर इनमें दर्ज जानकारी आपकी आय से मेल नहीं खाती तो रिटर्न दाखिल करना और भी जरूरी हो जाता है। जो लोग पात्र होने के बावजूद ITR फाइल नहीं करते उन्हें लेट फीस, जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए Form-16 में टैक्स शून्य होने के बावजूद सभी नियमों को समझकर समय पर ITR दाखिल करना ही समझदारी है।

इन्हें भी पढ़े:


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।