भारत और आसियान ने खेती, वानिकी में सहयोग के लिए पांच साल की रूपरेखा तैयार किया

भारत और आसियान ने खेती, वानिकी में सहयोग के लिए पांच साल की रूपरेखा तैयार किया

भारत और आसियान ने खेती, वानिकी में सहयोग के लिए पांच साल की रूपरेखा तैयार किया
Modified Date: September 10, 2026 / 07:41 pm IST
Published Date: September 10, 2026 7:41 pm IST

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) भारत और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) ने खेती और वानिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए पांच साल की नई कार्ययोजना शुरू करने पर सहमति जताई है। दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय राजधानी में इस विषय पर अपनी नौवीं मंत्री-स्तरीय बैठक की।

नौ सितंबर को हुई इस बैठक की सह-अध्यक्षता फिलिपीन के कृषि मंत्री फ्रांसिस्को पी. तियू लॉरेल (जो आसियान अध्यक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे थे) और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।

बैठक के बाद जारी बयान के अनुसार, वर्ष 2026-2030 के लिए नई आसियान-भारत मध्यम-अवधि कार्ययोजना चार मुख्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाएगी- जैसे कि मजबूत मूल्य श्रृंखला में नीतिगत बातचीत और व्यापार; संस्थागत नेटवर्किंग और डिजिटल नवाचार, तकनीकी सहयोग एवं संयुक्त अनुसंधान तथा किसानों के आदान-प्रदान के साथ-साथ मानव संसाधन विकास।

मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि योजना को लागू करते समय उन पहल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो व्यावहारिक और किसान-केंद्रित हों।

सहयोग के लिए चिह्नित क्षेत्रों में कम उत्सर्जन वाली धान की खेती, जल उत्पादकता, खेती में कृत्रिम मेधा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) का उपयोग, मिट्टी का स्वास्थ्य, जलवायु-अनुकूल फसलें, खाद्य सुरक्षा, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, फसल अवशेष जलाने के विकल्प और टिकाऊ वन प्रबंधन आदि शामिल हैं।

बैठक में वर्ष 2021-25 की मौजूदा योजना के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसमें वर्ष 2023 में जकार्ता और नयी दिल्ली में आयोजित आसियान-भारत मिलेट्स (मोटे अनाज) सम्मेलन और वर्ष 2024 में शुरू किए गए आसियान-भारत फेलोशिप कार्यक्रम जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। इस कार्यक्रम के तहत आसियान देशों के विद्यार्थियों को कृषि और संबंधित विज्ञान में पांच वर्षों के लिए 50 मास्टर छात्रवृत्ति दी जाएंगी।

मंत्रियों ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं – जैसे जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव, उर्वरक और ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव और व्यापार में रुकावट – ने मजबूत खाद्य और कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

उन्होंने मजबूत क्षेत्रीय निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और आपूर्ति के विविध स्रोतों की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें छोटे किसानों और कमजोर समूहों पर विशेष ध्यान दिया जाए।

बैठक में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों को नई योजना को समय-सीमा, मुख्य एजेंसियों और वित्तपोषण के स्रोतों के साथ एक ‘परिणाम-उन्मुख’ कार्य कार्यक्रम में बदलने का काम सौंपा गया। इस बात पर भी सहमति बनी कि मंत्रियों की बैठक का दसवां संस्करण 2028 में आयोजित किया जाएगा।

भाषा राजेश राजेश अजय

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