नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत में अधिक निवेश आकर्षित करने और देश में वाहन विनिर्माण को बढ़ावा देने में मददगार होगा। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही।
दोनों पक्षों ने 27 जनवरी को व्यापार समझौते के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की। यह समझौता अगले वर्ष से लागू होने की संभावना है।
वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने कहा कि समझौते पर बातचीत के दौरान वाहन क्षेत्र एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र के रूप में सामने आया। इसकी वजह यह है कि भारत में आयात शुल्क अधिक है, लेकिन देश ने इस समझौते के माध्यम से उन चुनौतियों को अवसरों में बदल दिया है।
जैन ने कहा कि भारत ने इस क्षेत्र में कोटा-आधारित, दीर्घकालिक समाधान प्रदान किए हैं ताकि यूरोपीय संघ को भी रियायतें मिलें और भारतीय उद्योग को पर्याप्त संरक्षण भी प्राप्त हो।
उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते पर उद्योग मंडल फिक्की के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘इससे भारत में अधिक निवेश होगा…। भारत में अधिक वाहनों का विनिर्माण होगा और तीसरे देशों को निर्यात बढ़ेगा। इस प्रकार भारत यूरोपीय संघ की मूल्य श्रृंखला में एकीकृत हो जाएगा।’’
भारत द्वारा यूरोपीय संघ के साथ एफटीए के तहत आयातित यूरोपीय कारों पर शुल्क को 110 प्रतिशत से धीरे-धीरे घटाकर 10 प्रतिशत करने पर सहमति जताने के बाद, आयातित यूरोपीय कारों की कीमतों में व्यापक रूप से गिरावट आने का अनुमान है। यह शुल्क प्रति वर्ष 2.5 लाख वाहनों पर लागू होगा, जो ब्रिटेन को दिए जाने वाले शुल्क से छह गुना अधिक है।
जैन ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौतों (एसएसए) पर कहा कि भारत का पहले से ही समूह के 27 सदस्य देशों में से 14 देशों के साथ यह समझौता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस बारे में सात यूरोपीय देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं और छह अन्य देशों के साथ समझौते की योजना बनाई जा रही है।’’
ये समझौते यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में सीमित अवधि के लिए काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा कोष में दोहरी राशि का योगदान करने से बचाने में मदद करते हैं।
ये समझौते इस लिहाज से महत्वपूर्ण हैं कि बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘…इनमें से कई लोग एक निश्चित अवधि के लिए काम करते हैं और कई बार जहां हमारे पास सामाजिक सुरक्षा सहायता योजना (एसएसए) नहीं होती है। वहां उन्हें भारत और सदस्य देशों में भी सामाजिक सुरक्षा में योगदान देना पड़ता है, लेकिन वे इसका लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए हमने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौते करने के लिए एक सुगम व्यवस्था बनाई है।’’
जैन ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ ने 70 देशों के साथ 40 से अधिक मुक्त व्यापार समझौते किए हुए हैं, जिनसे भारतीय निर्यातकों को लाभ मिल सकता है।
भाषा रमण प्रेम
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