भारत अपनी आर्थिक कमजोरियों की पहचान कर जोखिम प्रबंधन करे: ईएसी-पीएम चेयरमैन

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भारत अपनी आर्थिक कमजोरियों की पहचान कर जोखिम प्रबंधन करे: ईएसी-पीएम चेयरमैन

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  • Publish Date - May 4, 2026 / 04:46 PM IST,
    Updated On - May 4, 2026 / 04:46 PM IST

(बिजय कुमार सिंह)

नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव ने सोमवार को कहा कि देश को भविष्य में पश्चिम एशिया जैसे संकट का असर कम करने के लिए ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक, धातु एवं महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में अपनी आर्थिक कमजोरियों को चिह्नित कर उन पर निगाह रखनी चाहिए।

देव ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने जोखिम प्रबंधन के लिए दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति बाधाओं और कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए सक्रिय रणनीति अपनानी जरूरी है।

देव ने कहा, ‘इसके लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के विस्तार और आवश्यक वस्तुओं के भंडारण जैसी भौतिक सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा। केवल विदेशी मुद्रा भंडार और खाद्यान्न भंडार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।’

उन्होंने कहा, “भारत को ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक, धातु और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रमुख आर्थिक कमजोरियों की पहचान कर उनकी निगरानी करनी चाहिए और आपूर्ति में बाधाओं एवं कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए सक्रियता दिखाते हुए कदम उठाने चाहिए।”

ईएसी-पीएम के प्रमुख ने आयात पर अत्यधिक निर्भरता को घटाने पर जोर देते हुए कहा, ‘आपूर्ति स्रोतों और व्यापार मार्गों में विविधता लाने के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का प्रभावी उपयोग करना जरूरी है। दीर्घावधि में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना स्थायी समाधान होगा।’

पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतें 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

भारत के अपनी लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल और 50 प्रतिशत गैस जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर होने से वैश्विक झटकों का व्यापक असर देखने को मिला है।

देव ने वैश्विक स्तर पर भविष्य में भी अनिश्चितताओं और बार-बार आने वाले झटकों की संभावना का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में तगड़ा मुनाफा कमाने वाले भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र को निजी निवेश बढ़ाकर देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद के कारण सुदृढ़ बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में आर्थिक वृद्धि 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2026-27 में कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल रहने की स्थिति में वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत और मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत रह सकती है।

देव ने कहा कि चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में एक प्रतिशत से कम रहा, जबकि चालू वित्त वर्ष में इसमें कुछ बढ़ोतरी संभव है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में आई बड़ी गिरावट पर उन्होंने कहा कि रुपये में हाल की गिरावट वैश्विक अनिश्चितताओं का नतीजा है और यह अस्थायी है। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशक स्थिति सामान्य होने पर वापस लौट सकते हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण