एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों को साथ मिलकर विकास पर करना होगा कामः एडीबी अध्यक्ष

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एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों को साथ मिलकर विकास पर करना होगा कामः एडीबी अध्यक्ष

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  • Publish Date - May 4, 2026 / 06:22 PM IST,
    Updated On - May 4, 2026 / 06:22 PM IST

(कुमार दीपांकर)

समरकंद (उजबेकिस्तान), चार मई (भाषा) एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अध्यक्ष मसातो कांडा ने जुझारू एवं समावेशी आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सोमवार को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों से आपसी सहयोग बढ़ाने और मजबूत सीमापार संपर्क विकसित करने का आह्वान किया।

कांडा ने एडीबी की यहां आयोजित 59वीं वार्षिक बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “इस नए दौर में लिए जाने वाले निर्णय अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करेंगे। खंडित वैश्विक परिदृश्य में पारंपरिक और अलग-थलग वृद्धि रणनीतियां कारगर नहीं होंगी।”

उन्होंने कहा कि ऊर्जा बाजार, आपूर्ति शृंखला और डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से झटके तेजी से सीमाओं के पार फैलते हैं और कमजोर समुदायों को अधिक प्रभावित करते हैं। ऐसे में इन चुनौतियों से निपटने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित समाधान जरूरी हैं।

एडीबी प्रमुख ने कहा कि बैंक इस दिशा में निवेश बढ़ा रहा है और ऐसे सुधार लागू कर रहा है, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, बाजारों और संस्थानों का एकीकरण हो सके।

एशियाई विकास बैंक ने पिछले वर्ष एशिया-प्रशांत क्षेत्र को 29.3 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता दी थी।

कांडा ने बताया कि एडीबी ने 70 अरब डॉलर का एक नया कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें 50 अरब डॉलर की पैन-एशिया बिजली ग्रिड परियोजना और 20 अरब डॉलर की सीमापार डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने की पहल शामिल है। इसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, उत्सर्जन कम करना और डिजिटल अंतर को पाटना है।

एडीबी के मुताबिक, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण इस साल एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 4.7 प्रतिशत रह सकती है, जो पिछले वर्ष 5.4 प्रतिशत थी। वहीं मुद्रास्फीति दर 3.0 प्रतिशत से बढ़कर 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

कांडा ने कहा कि यदि यह संघर्ष आगे बढ़ता है और तेल कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो वृद्धि दर और भी नीचे गिरकर 4.2 प्रतिशत तक आ सकती है जबकि मुद्रास्फीति दर 7.4 प्रतिशत तक जा सकती है।

उन्होंने कहा कि एडीबी क्षेत्र में स्थिरता का आधार बनकर उभर रहा है और वह वित्तपोषण, परामर्श और संसाधन जुटाने के जरिए सदस्य देशों को मौजूदा चुनौतियों से निपटने में मदद करता रहेगा।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण