भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से भारत के कपड़ा क्षेत्र को मिलेगी गति: सरकार

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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से भारत के कपड़ा क्षेत्र को मिलेगी गति: सरकार

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 10:04 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 10:04 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) सरकार ने सोमवार को कहा कि न्यूजीलैंड एक महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है और इस देश के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारत के कपड़ा और परिधान क्षेत्रों के लिए विकास के नए अवसर खुलेंगे।

कपड़ा मंत्रालय ने इस ‘ऐतिहासिक व्यापार समझौते’ का स्वागत किया, जो ‘विश्वास, विकास और साझा समृद्धि पर आधारित भविष्य के लिए तैयार साझेदारी’ को दर्शाता है।

मंत्रालय ने कहा कि यह एफटीए कपड़ा डिजाइन हाउस और फैशन प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ सहयोग करने के द्वार भी खोलता है। मंत्रालय ने कहा कि प्रमुख कपड़ा मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेकर इस एफटीए का पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए।

मंत्रालय ने कहा कि न्यूजीलैंड एक महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है और यह मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत को अपने निर्यात को बढ़ाने में सक्षम बनाएगा।

न्यूजीलैंड का बाजार भारत के कपड़ा, परिधान और ‘मेड-अप्स’ (तौलिया, तकिये का कवर आदि) के निर्यात के लिए एक अवसर प्रदान करता है।

परिधान क्षेत्र का न्यूजीलैंड के वैश्विक आयात में 65 प्रतिशत हिस्सा है।

परिधान क्षेत्र के तहत आयात के प्रमुख उप-क्षेत्रों में ‘कैजुअल वियर’ (जींस, टी-शर्ट, हुडी, आरामदायक टॉप, कैजुअल ड्रेस), जैकेट, ‘फॉर्मल वियर’ और ‘स्पोर्ट्स वियर’ शामिल हैं। इन आयातों में सूती परिधानों का हिस्सा 45 प्रतिशत है। इसके बाद मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) का स्थान आता है, जिसका हिस्सा 36 प्रतिशत है।

मौजूदा समय में, न्यूजीलैंड में 575 शुल्क-योग्य एमएफएन शुल्क श्रेणियां (टैरिफ लाइन) हैं, जिनमें कुछ ऊन, एमएमएफ और ‘मेड-अप्स’ पर 5 प्रतिशत शुल्क, तथा कालीन, कुछ एमएमएफ और परिधानों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगता है। इसलिए, एक एफटीए भारतीय निर्यात की लागत को कम करेगा।

पिछले एक दशक में, न्यूजीलैंड को भारत के कपड़ा, परिधान और ‘मेड-अप्स’ क्षेत्र के निर्यात में एक सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। परिधान, मेड-अप्स, कालीन, फाइबर, धागा और कपड़े जैसे सभी उप क्षेत्रों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है।

भाषा राजेश

राजेश रमण

रमण