आईएसएमआर बैठक में भारत-सिंगापुर ने विनिर्माण, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की
आईएसएमआर बैठक में भारत-सिंगापुर ने विनिर्माण, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की
सिंगापुर, 20 अगस्त (भाषा) भारत और सिंगापुर ने बृहस्पतिवार को यहां चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक (आईएसएमआर) में उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, संपर्क, डिजिटल, वित्तीय प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितिन प्रसाद बैठक में शामिल हुए।
सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप प्रधानमंत्री एवं व्यापार और उद्योग मंत्री (व्यापार) गान किम योंग ने किया।
प्रतिनिधिमंडल में गृह मामलों के मंत्री के. षणमुगम, विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालाकृष्णन, डिजिटल विकास एवं सूचना मंत्री जोसेफिन टीओ तथा परिवहन मंत्री एवं दूसरे वित्त मंत्री जेफरी सिओ भी शामिल हैं।
बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि दोनों पक्षों ने उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, संपर्क, डिजिटल, वित्तीय प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, हरित अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की।
‘चैनल न्यूज एशिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में गान ने भारतीय मंत्रियों के साथ हुई बातचीत को उपयोगी बताया।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ स्पष्ट और खुले रहे, जिससे द्विपक्षीय सहयोग में प्रगति संभव हुई है।
उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में गान ने कहा कि 2024 में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के बाद से कई सेमीकंडक्टर विनिर्माताओं ने भारत में निवेश किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देशों के मंत्रियों ने कंपनियों के लिए भारत में प्रवेश आसान बनाने के तरीकों पर भी चर्चा की। भारतीय कार्यबल को उन्नत विनिर्माण के लिए तैयार करने के लिए कौशल उन्नयन और प्रशिक्षण में भी हमारी रुचि है।’’
गान ने कहा, ‘‘हम विशेष रूप से सेमीकंडक्टर के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में सक्षम होने की उम्मीद करते हैं।’’
उन्होंने कहा कि सिंगापुर और भारत के बीच निवेश तथा व्यापार बढ़ने के साथ दोनों देशों ने हवाई संपर्क बढ़ाने की जरूरत पर भी चर्चा की।
गान ने कहा कि सिंगापुर के ‘पेनाउ’ और भारत के ‘यूपीआई’ के बीच सहयोग अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि कई देशों की डिजिटल भुगतान प्रणालियों को जोड़ने वाले ‘प्रोजेक्ट नेक्सस’ को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा। भारत और सिंगापुर इस परियोजना के संस्थापक सदस्यों में हैं।
उन्होंने कहा कि सिंगापुर एक्सचेंज (एसजीएक्स) भी भारतीय शेयर बाजार के साथ सहयोग करने को इच्छुक है। दोनों पक्ष डेरिवेटिव और दोहरी सूचीबद्धता शुरू करने के विकल्प तलाश रहे हैं, जिससे भारतीय कंपनियों को क्षेत्र में पूंजी तक अधिक पहुंच मिल सके।
स्थिरता के क्षेत्र में दोनों देशों ने कोविड-19 महामारी जैसी संकट की स्थितियों के दौरान आपूर्ति बाधा को रोकने के तरीकों पर भी चर्चा की।
गान ने कहा कि सिंगापुर भारत के साथ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और परमाणु प्रौद्योगिकी जैसे साझा हितों वाले अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग करने का इच्छुक है।
भारत और सिंगापुर ने बृहस्पतिवार को दो समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए।
सिंगापुर खाद्य एजेंसी और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के बीच हुए समझौते का उद्देश्य तकनीकी सहयोग मजबूत करना और दोनों देशों के बीच कृषि-खाद्य व्यापार को सुगम बनाना है।
इसके अलावा, सिंगापुर के संस्कृति, समुदाय एवं युवा मंत्रालय और भारत के पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय ने समुद्री विरासत के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
इसके तहत सूचना और प्रशिक्षण का आदान-प्रदान तथा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
दोनों देशों ने दूरसंचार और प्रसारण के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक आशय पत्र पर भी हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य सूचना, अनुभव और बेहतर तौर-तरीकों का आदान-प्रदान करना है। इसमें उपभोक्ता संरक्षण और प्रसारण नियमों से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं।
मंत्रियों ने दोनों देशों के कारोबारियों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि आईएसएमआर ने भारत-सिंगापुर व्यापार गोलमेज के प्रतिभागियों के साथ भी बातचीत की और इस आधुनिक एवं दूरदर्शी साझेदारी को आगे बढ़ाना साझा प्रयास है।
गान ने कहा कि कुछ अड़चनों के बावजूद मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में अच्छी प्रगति हुई, हालांकि उन्होंने इन मुद्दों का विवरण नहीं दिया।
भाषा योगेश अजय
अजय

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