भारत में 2031 तक 5जी ग्राहकों की संख्या 1.1 अरब तक पहुंचने का अनुमान : रिपोर्ट
भारत में 2031 तक 5जी ग्राहकों की संख्या 1.1 अरब तक पहुंचने का अनुमान : रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) भारत में 2031 के अंत तक 5जी ग्राहकों की संख्या 1.1 अरब को पार कर सकती है, जो कुल कनेक्शन का 81 प्रतिशत होगी।
स्वीडन की दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी एरिक्सन की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक 5जी ग्राहकों की संख्या 43 करोड़ तक पहुंच गई थी और कुल मोबाइल कनेक्शन में इनकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत थी।
‘एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट’ के अनुसार, भारत प्रति स्मार्टफोन मोबाइल डेटा खपत के मामले में भी वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना हुआ है। औसत मासिक उपयोग 37 जीबी है जिसके 2031 तक लगभग दोगुना होकर 70 जीबी तक पहुंचने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 5जी को अपनाने की रफ्तार जारी है, जिसे किफायती 5जी स्मार्टफोन और उपकरणों की उपलब्धता, लगभग सभी जिलों में विस्तारित नेटवर्क दायरे और 5जी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) सेवाओं के बढ़ते विस्तार से बल मिल रहा है।
इसमें कहा गया कि 46 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ 4जी अब भी प्रमुख प्रौद्योगिकी बनी हुई है। हालांकि, उपयोगकर्ताओं के 5जी की ओर रुख के कारण 2025 में इसके ग्राहकों के लगभग 57 करोड़ से घटकर 2031 तक करीब 16 करोड़ रह जाने का अनुमान है।
एरिक्सन इंडिया के प्रबंध निदेशक नितिन बंसल ने कहा कि भारत में 5जी अपनाने की तेज रफ्तार उन्नत मोबाइल ब्रॉडबैंड पर आधारित है।
उन्होंने कहा, ‘‘ देश में मजबूत और सुरक्षित 5जी अवसंरचना समावेशन, सुशासन तथा नवाचार को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ा रही है और डिजिटल इंडिया के लिए एक सशक्त आधार के रूप में काम कर रही है।’’
रिपोर्ट में किसी का नाम लिए बिना ‘‘एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम’’ की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें भारत में एक सेवा प्रदाता ने हाल ही में अपने पोस्टपेड 5जी ग्राहकों के लिए ‘नेटवर्क स्लाइसिंग’ आधारित संपर्क सेवाएं शुरू की हैं, जो बाजार में उन्नत 5जी उपयोग मामलों के विकास का संकेत देती हैं।
वैश्विक स्तर पर, 2026 की पहली तिमाही में 5जी मोबाइल ग्राहक तीन अरब के आंकड़े के पार पहुंच गए। दूरसंचार सेवाप्रदाताओं द्वारा 5जी स्टैंडअलोन (एसए) नेटवर्क स्लाइसिंग के व्यावसायिक प्रस्तावों में उल्लेखनीय वृद्धि जारी है, जबकि कई सेवा प्रदाताओं के लिए अपलिंक मोबाइल डेटा ट्रैफिक वृद्धि पहले ही डाउनलिंक से अधिक हो चुकी है।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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