भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से कृषि, प्रसंस्कृत खाद्य, वाहन निर्यात को मिलेगा बढ़ावा: विशेषज्ञ

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से कृषि, प्रसंस्कृत खाद्य, वाहन निर्यात को मिलेगा बढ़ावा: विशेषज्ञ

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से कृषि, प्रसंस्कृत खाद्य, वाहन निर्यात को मिलेगा बढ़ावा: विशेषज्ञ
Modified Date: August 5, 2026 / 07:39 pm IST
Published Date: August 5, 2026 7:39 pm IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को शुल्क-मुक्त या रियायती शुल्क का लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे ब्रिटेन के बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। विशेषज्ञों ने बुधवार को यह राय जताई।

विशेषज्ञों के अनुसार, 15 जुलाई से लागू हुए इस व्यापार समझौते से सीमा शुल्क में आई कमी के कारण भारत के वाहन निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ी संभावना जिंस-आधारित निर्यात से आगे बढ़कर मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने में है। वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात 49.43 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो देश के कुल निर्यात का लगभग 11.2 प्रतिशत था।

डेलॉयट में दक्षिण एशिया के साझेदार एवं उपभोक्ता उद्योग प्रमुख आनंद रामनाथन ने कहा, ‘‘भारत-ब्रिटेन सीईटीए से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला को शुल्क-मुक्त या रियायती शुल्क का लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नहीं रखने वाले देशों के आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में ब्रिटेन के बाजार में भारतीय उत्पादों की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और पारंपरिक निर्यात बाजारों से आगे नए बाजारों में पहुंच बनाने में भी मदद मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि यह समझौता निर्यातोन्मुख कृषि, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं और कृषि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने की रफ्तार तेज करेगा। अब बाजार तक पहुंच केवल शुल्क पर निर्भर नहीं रह गई है, बल्कि उत्पाद की पहचान का पता लगाने की व्यवस्था, प्रमाणन, गुणवत्ता आश्वासन और समय पर विश्वसनीय आपूर्ति जैसे मानकों पर भी निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि देश में फसल कटाई के बाद होने वाला वार्षिक नुकसान लगभग 92,651 करोड़ रुपये आंका गया है। डिजिटल प्रौद्योगिकी इन कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

डेलॉयट इंडिया में अप्रत्यक्ष कर एवं वैश्विक व्यापार सलाहकार प्रमुख गुलजार डिडवानिया ने कहा कि यह समझौता भारतीय वाहन उद्योग के लिए भी लाभकारी होगा। इससे वाहन निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जबकि आयात शुल्क में कमी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।

उन्होंने कहा कि निर्यात के मामले में ब्रिटेन भारतीय वाहनों पर लगने वाले अधिकतम 18 प्रतिशत आयात शुल्क को समाप्त कर देगा। हालांकि, यात्री वाहनों, जिनमें इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन को यह रियायत निर्धारित आयात सीमा (शुल्क दर कोटे) के तहत मिलेगी। वहीं, वाहनों के कलपुर्जों पर लगने वाला लगभग दो से चार प्रतिशत शुल्क भी समाप्त कर दिया जाएगा।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम


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