ब्रिटेन में भारतीय उद्यमी का नया स्टार्ट-अप सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एआई का करता है इस्तेमाल

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ब्रिटेन में भारतीय उद्यमी का नया स्टार्ट-अप सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एआई का करता है इस्तेमाल

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  • Publish Date - September 17, 2023 / 06:40 PM IST,
    Updated On - September 17, 2023 / 06:40 PM IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, 17 सितंबर (भाषा) भारतीय उद्यमी का नया स्टार्ट-अप दुनिया भर के निवेशकों का आकर्षित कर रहा है और यह विश्व स्तर पर अपनी तरह की पहली कंपनी है जो उपभोक्ताओं को अपने अनूठे संवादात्मक कृत्रिम मेधा (एआई) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके नलसाज, बिजली का काम करने वालों और अन्य सेवाओं को बुक करने का विकल्प प्रदान करती है।

अनुज गुप्ता का ‘ग्रीनवैन’ एक सरल व्हाट्सएप इंटरफेस का इस्तेमाल करता है। इसे ‘अमेजन ऑफ सर्विसेज’ की पेशकश के रूप में डिजाइन किया गया है जिसका मकसद लोगों के आवश्यक कार्यों को ऑनलाइन बुक करने के तरीके को बदलना है। इसके लिए हाल ही में वित्त कोष चक्र खोला गया।

अमेरिका से करीब पांच साल पहले ब्रिटेन में जा बसे गुप्ता को वहां कई तरह की सेवाओं का लाभ उठाने के लिए कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्मकार में कहा, ‘‘ विभिन्न सेवाओं से जुड़े लोगों से संपर्क साधते समय हम अक्सर असमंजस में पड़ जाते थे और एक ऐसी प्रणाली से हमारा सामना होता है जो बेहद अजीब है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ जैसे-जैसे मैंने उद्योग को गहराई से जाना। मुझे अधिक से अधिक समस्याओं का पता चला। ये करीब 87 प्रतिशत छोटे, स्वतंत्र (और अक्सर परिवार के स्वामित्व वाले) व्यवसाय द्वारा संचालित हैं। साथ ही ये काफी जटिल व इसके काफी बिखराव है…’’

‘ग्रीनवैन’ पर काम कोविड-19 वैश्विक महामारी से ठीक पहले 2020 में शुरू हुआ। उस समय इसकी असली परीक्षा भी हुई क्योंकि तब दुनिया प्रौद्योगिकी को अपना रही थी और अधिक से अधिक चीजें ऑनलाइन उपलब्ध हो रही थी।

गुप्ता ने कहा कि तब से उनकी टीम ने कुछ वर्ष ग्रीनवैन की ‘ऑन-बोर्डिंग’ संवाद प्रौद्योगिकी को बेहतर बनाने पर काम किया।

ब्रिटेन में इसकी शुरुआत करने के बाद अब आने वाले महीनों में ग्रीनवैन की नजर अमेरिकी बाार और कुछ वर्षों बाद भारत में विस्तार करने पर टिकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं भारत से हूं और इसलिए मुझे भारत की ओर रुख करना अच्छा लगेगा। हालांकि मुझे लगता है कि वहां अभी पारिस्थितिकी तंत्र इसके लिए तैयार नहीं है क्योंकि यातायात अनुमान, लेनदेन मूल्य, क्रेडिट कार्ड पहुंच, स्मार्ट फोन पहुंच आदि के संदर्भ में व्यापक विस्तार के लिए सभी का एक निश्चित स्तर पर होना जरूरी है। इसलिए ब्रिटेन एक महान इनक्यूबेटर है और अगला लक्षित बाजार अमेरिका होगा।’’

भाषा

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