नयी दिल्ली, सात फरवरी (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के तहत अमेरिका को होने वाले लगभग 44 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर शून्य जवाबी शुल्क लगेगा। इस समझौते पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
भारत और अमेरिका ने घोषणा की है कि वे एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे।
इसके तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा, वहीं भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर आयात शुल्क समाप्त या कम करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं।
गोयल ने संवाददाताओं से कहा, ”लगभग 44 अरब डॉलर मूल्य का भारतीय निर्यात (अमेरिका को) शून्य जवाबी शुल्क पर जाएगा।”
जहां लगभग 30 अरब डॉलर मूल्य की भारतीय वस्तुओं पर 18 प्रतिशत शुल्क लगता रहेगा (जिसमें श्रम-प्रधान क्षेत्रों की वस्तुएं शामिल हैं), वहीं 12 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं (इस्पात, तांबा और कुछ वाहन घटक सहित) के शुल्क में कोई बदलाव नहीं होगा। इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा और वाहन घटक पर ये शुल्क सभी देशों पर समान रूप से लागू होते हैं। इसलिए ये केवल भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित नहीं करते हैं। इन उत्पादों पर अमेरिका में 50 प्रतिशत शुल्क लगता है।
गोयल ने कहा कि शुल्क में कमी से कपड़ा, परिधान, चमड़ा और जूते-चप्पल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के निर्यात को तत्काल बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, ”जिस अंतरिम समझौते को अंतिम रूप दिया गया है, उसे जल्द ही हमारे संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की पहली किस्त में बदल दिया जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता 2030 तक 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि दोनों देश एक ”बहुत ही निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित” समझौते पर पहुंचे हैं, जो भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी जवाबी शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। एक कार्यकारी आदेश के जरिये अमेरिका द्वारा 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा। यह आदेश जल्द ही आ सकता है।
उन्होंने कहा, ”इसके अतिरिक्त जेनेरिक दवा, विमान के पुर्जों, वाहन घटक आदि जैसे कई भारतीय उत्पादों पर शून्य प्रतिशत शुल्क दिया जाएगा।”
गोयल ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में भारतीय निर्यात के लिए व्यापक संभावनाएं खुलेंगी। यह समझौता एमएसएमई, किसानों, मछुआरों, युवाओं, महिलाओं और भारत के प्रतिभाशाली लोगों के लिए अवसर प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि इससे किसानों और मछुआरों को अमेरिकी बाजार में अपनी उपज की बेहतर कीमत पाने में मदद मिलेगी और ”भविष्य में कपड़ा और परिधान, रत्न और आभूषण, मशीनरी के पुर्जे, खिलौने, चमड़ा और जूते-चप्पल, घरेलू सजावट, स्मार्टफोन और कृषि के कई क्षेत्रों में भारी वृद्धि होगी।
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है और उन क्षेत्रों में कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। इनमें कृषि उत्पाद, मांस, पोल्ट्री, सभी डेयरी उत्पाद, जीएम खाद्य उत्पाद, सोया मील, मक्का, अनाज, मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, चौलाई, फल जैसे केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी और खट्टे फल शामिल हैं। अन्य उत्पादों में हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, कुछ पशु आहार, मूंगफली, शहद, माल्ट और इसके अर्क, गैर-अल्कोहल पेय, आटा, स्टार्च, आवश्यक तेल, ईंधन के लिए एथनॉल और तंबाकू शामिल हैं।
गोयल ने कहा, ”यह वास्तव में एक ऐसा समझौता है जो भारत में किसानों, मछुआरों और उद्योग को भारी लाभ देगा।”
भाषा पाण्डेय
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