अमेरिकी छूट के बाद भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने दो करोड़ बैरल रूसी तेल खरीदा

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अमेरिकी छूट के बाद भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने दो करोड़ बैरल रूसी तेल खरीदा

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 08:43 PM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 08:43 PM IST

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया संकट से तेल आपूर्ति बाधित होने के बीच भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अमेरिका से मिली 30 दिन की अस्थायी छूट का फायदा उठाते हुए समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। शुक्रवार को सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय रिफाइनरों ने लगभग दो करोड़ बैरल रूसी तेल खरीद लिया है, जो अधिकतर गैर-प्रतिबंधित इकाइयों से लिया गया है। रिफाइनिंग कंपनियां इस बारे में कानूनी राय भी ले रही हैं कि क्या अमेरिकी छूट के तहत प्रतिबंधित संस्थाओं से भी खरीद की अनुमति है या नहीं।

भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने रूसी तेल खरीद के लिए अमेरिका से मिली अस्थायी छूट के बाद यह कदम उठाया है। अमेरिका ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विरोध में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर कई पाबंदियां लगाई हुई हैं।

हालांकि, पश्चिम एशिया संकट गहराने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने एक 30-दिन का लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत पांच मार्च, 2026 से पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी मूल के कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों की भारत में आपूर्ति करने और उतारने की अनुमति दी गई है।

यह छूट चार अप्रैल, 2026 तक प्रभावी रहेगी, बशर्ते खरीदार भारतीय कानून के तहत पंजीकृत इकाई हो।

भारत 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था, लेकिन हाल के महीनों में अमेरिकी दबाव के चलते इस खरीद में खासी गिरावट आई थी।

इस कटौती की वजह से अमेरिका ने फरवरी की शुरुआत में भारतीय उत्पादों पर लगाए 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को हटाने के साथ ही एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनने की भी घोषणा की थी।

पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदना कभी पूरी तरह बंद नहीं किया और ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखने की अपनी नीति पर कायम रहा।

फरवरी के अंत तक भारत रूस से प्रतिदिन लगभग 10.4 लाख बैरल तेल खरीद रहा था, जो मई, 2023 के 21.5 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से बहुत कम है।

फिलहाल करीब 1.5 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में टैंकर पर मौजूद है, जबकि लगभग 70 लाख बैरल तेल सिंगापुर के पास खड़े जहाजों में है। इसके अलावा भूमध्य सागर और स्वेज नहर क्षेत्र में भी रूसी तेल के टैंकर हैं, जो एक महीने के भीतर भारत पहुंच सकते हैं।

रिफाइनिंग कंपनियों में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) ने दिसंबर के बाद रूसी तेल खरीद फिर से शुरू कर दी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी रूसी तेल डिलिवरी की तलाश में है।

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और एलएनजी की आपूर्ति बाधित होने की आशंका है, जिससे भारत अपने भंडार को मजबूत करने के लिए समुद्र में उपलब्ध रूसी तेल की खरीद बढ़ा रहा है।

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस छूट को अस्थायी बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक तेल प्रवाह को स्थिर रखना है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा।

विश्लेषकों का मानना है कि यह छूट भारतीय रिफाइनरों को अल्पकालिक राहत देती है, लेकिन चीन जैसे अन्य खरीदारों से प्रतिस्पर्धा के बीच पश्चिम एशिया से प्रतिदिन 26 लाख बैरल तेल की आपूर्ति बाधित होने की भरपाई हो पाना मुश्किल है।

भाषा प्रेम

अजय प्रेम

अजय