भारत का सेमीकंडक्टर अभियान कार, टीवी और बिजली ढांचे के लिए चिप पर केंद्रित: वैष्णव
भारत का सेमीकंडक्टर अभियान कार, टीवी और बिजली ढांचे के लिए चिप पर केंद्रित: वैष्णव
नयी दिल्ली, 20 सितंबर (भाषा) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत अगले कुछ वर्षों में सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में ऐसी क्षमता विकसित करना चाहता है, जिससे कार, टेलीविजन और रेफ्रिजरेटर जैसे रोजमर्रा के उत्पादों के साथ-साथ बिजली क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल होने वाले चिप भी देश में डिजाइन और निर्मित किए जा सकें।
भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के प्रयास कर रहा है। सरकार चिप की असेंबली और परीक्षण से आगे बढ़कर डिजाइन, विनिर्माण, उपकरण और सामग्री के क्षेत्र में क्षमता विकसित करना चाहती है।
सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण के तहत सरकार ने घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है।
सरकार ने हाल में कहा था कि सेमीकंडक्टर योजना के दूसरे चरण के तहत उसे निवेशकों से करीब एक लाख करोड़ रुपये की रुचि मिली है।
वैष्णव ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि अगले पांच वर्षों के भीतर भारत को कार, बिजली प्रणालियों, टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर और अन्य घरेलू उपकरणों के लिए चिप डिजाइन और विनिर्माण करने में सक्षम होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘ कार, स्कूटर और मोटरसाइकिल में इस्तेमाल होने वाले कई चिप का विनिर्माण हमारे देश में हो रहा है। हमें इनमें से कई चिप को भारत में ही डिजाइन और निर्मित करने में सक्षम होना चाहिए।’’
मंत्री ने कहा कि बिजली क्षेत्र में भी ऐसी ही क्षमता विकसित की जानी चाहिए। इसमें पारेषण लाइन, ट्रांसफॉर्मर और कन्वर्टर में इस्तेमाल होने वाले चिप शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘बिजली क्षेत्र में कई चिप इस्तेमाल होते हैं, मसलन पारेषण लाइन, ट्रांसफॉर्मर और कन्वर्टर में। हमें ऐसे कई चिप का विनिर्माण करने में सक्षम होना होगा, जिन्हें भारत में ही डिजाइन और बनाया जाए।’’
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में वैष्णव ने कहा कि टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर और अन्य घरेलू उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले कई चिप भी भारत में ही डिजाइन और निर्मित किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हम वास्तव में चिप को नहीं देखते, हम तैयार उत्पाद देखते हैं। जब हम टीवी खरीदते हैं, तो उसके अंदर लगे चिप को नहीं देखते, लेकिन वही चिप पूरे उपकरण को संचालित करता है।’’
उन्होंने सेमीकंडक्टर को टेलीविजन का ‘दिमाग’ और ‘दिल’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘इस दिशा में आगे बढ़ना बहुत अच्छा होगा।’’
वैष्णव ने उत्तर प्रदेश में स्थापित हो रहे डिस्प्ले-कंट्रोल मॉड्यूल संयंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि यह उन क्षमताओं का एक उदाहरण है, जिन्हें भारत विकसित करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि यह मॉड्यूल टेलीविजन पर अंतिम तस्वीर के प्रदर्शन को नियंत्रित करता है और इसका विनिर्माण देश में किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘डिस्प्ले-कंट्रोल मॉड्यूल यह नियंत्रित करता है कि टीवी अंतिम तस्वीर को किस तरह प्रदर्शित करेगा। यह टेलीविजन का दिल और दिमाग है। इसका विनिर्माण भारत में होने जा रहा है… ऐसे बहुत से उत्पाद हैं।’’
मंत्री ने क्रिस्टल मैट्रिक्स की प्रस्तावित एलईडी डिस्प्ले विनिर्माण इकाई का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि कंपनी ने तकनीकी स्तर को 90 माइक्रोन से घटाकर 40 माइक्रोन तक कर लिया है और भारत में अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘वे सभी बड़े स्क्रीन और एलईडी स्क्रीन भारत में ही डिजाइन और निर्मित किए जाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि ऐसे कई उत्पादों का डिजाइन और विनिर्माण धीरे-धीरे देश में ही होने लगेगा।
भाषा योगेश पाण्डेय
पाण्डेय

Facebook


