चाय उद्योग के दिग्गज वाघ बकरी टी ग्रुप के चेयरमैन पीयूषभाई देसाई का निधन

चाय उद्योग के दिग्गज वाघ बकरी टी ग्रुप के चेयरमैन पीयूषभाई देसाई का निधन

चाय उद्योग के दिग्गज वाघ बकरी टी ग्रुप के चेयरमैन पीयूषभाई देसाई का निधन
Modified Date: September 20, 2026 / 04:25 pm IST
Published Date: September 20, 2026 4:25 pm IST

अहमदाबाद, 20 सितंबर (भाषा) वाघ बकरी टी ग्रुप के चेयरमैन पीयूषभाई देसाई का 15 सितंबर को निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। चाय कारोबार को गांधीवादी मूल्यों, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने वाले देसाई के निधन की जानकारी वाघ बकरी टी ग्रुप ने एक बयान में दी।

ग्रुप की ओर से जारी शोक संदेश के अनुसार, देसाई छह दशक से अधिक समय से चाय कारोबार से जुड़े थे और उन्होंने वाघ बकरी को गुजरात से बाहर कई राज्यों में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ग्रुप ने कहा कि देसाई को चाय की गहरी समझ थी।

गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कुलपति सुदर्शन अयंगर ने उन्हें ऐसे उद्यमी के रूप में याद किया, जिनके जीवन में महात्मा गांधी के आदर्शों की झलक मिलती थी।

अयंगर के अनुसार, देसाई का गांधी से जुड़ाव उनके दादा के जरिये था, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी से मुलाकात की थी। इस पारिवारिक संबंध के कारण गांधी के ‘ट्रस्टीशिप’ के विचार के अनुरूप लोगों की मदद करना और सादगी से जीवन जीना देसाई की प्राथमिकताओं में शामिल था।

अयंगर ने वाघ बकरी नाम के पीछे देसाई द्वारा बताई गई व्याख्या को भी याद किया।

उनके अनुसार, देसाई कहा करते थे कि ऐसी जगह जहां बाघ और बकरी एक साथ पानी पी सकें, वह अहिंसक समाज का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि ब्रांड प्रसिद्ध हुआ, लेकिन उसके पीछे अहिंसक समाज की अवधारणा थी, जिसके माध्यम से देसाई गांधी का संदेश आगे बढ़ा रहे थे।

शोक संदेश के अनुसार, देसाई गुजरात विद्यापीठ से गहराई से जुड़े रहे और गांधीवादी विचारों से संबंधित पहल में योगदान देते रहे।

अयंगर ने बताया कि देसाई ‘अनुवाद फाउंडेशन’ के संस्थापक निदेशक थे। यह संस्था गुजरात विद्यापीठ के तत्कालीन कुलाधिपति नारायण देसाई के साथ मिलकर स्थापित की गई थी।

अयंगर भी इस फाउंडेशन के निदेशक रहे। इसके दो प्रमुख उद्देश्य महात्मा गांधी की शेष रचनाओं और महादेवभाई देसाई की डायरी का अनुवाद करना तथा अच्छी साहित्यिक और ज्ञानवर्धक सामग्री का एक भारतीय भाषा से दूसरी भारतीय भाषा में सीधे अनुवाद को बढ़ावा देना था, जिसमें अंग्रेजी या हिंदी को माध्यम न बनाया जाए।

अयंगर के अनुसार, 2002 के गुजरात दंगों के दौरान देसाई कॉरपोरेट जगत की उन चुनिंदा आवाज में शामिल थे, जिन्होंने हिंसा के खिलाफ खुलकर बात की।

उन्होंने कहा कि देसाई ने चुनी काका और अन्य लोगों द्वारा आयोजित कोचरब आश्रम से गांधी आश्रम तक शांति मार्च में हिस्सा लिया था और वह हिंसा के पूरी तरह खिलाफ थे।

अयंगर ने देसाई को याद करते हुए कहा कि उनका मानना था कि हिंसा पूरे समाज की विफलता है।

उन्होंने कहा कि देसाई सरकार की गलतियों की ओर भी इशारा करते थे, लेकिन अहिंसक तरीके से अपनी बात रखते थे।

देसाई ने 2016 से 2020 तक ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन (बीपीए) के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। संस्था के महासचिव भूषण पुनानी ने उन्हें महान इंसान और परोपकारी बताया।

भाषा योगेश अजय

अजय


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