गंगटोक/शिमला, एक अगस्त (भाषा) भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार सिक्किम के नाथू ला दर्रे और हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला दर्रे के रास्ते शनिवार को छह साल बाद फिर शुरू हो गया।
कोविड-19 महामारी के बाद भारत-चीन सीमा संबंधों में आए तनाव के कारण वर्ष 2020 से यह व्यापार बंद था।
पूर्वी सिक्किम स्थित नाथू ला में औपचारिक उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें दोनों देशों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही समुद्र तल से 14,000 फुट से अधिक ऊंचाई पर स्थित इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दर्रे के जरिए मौसमी व्यापार की वापसी हुई।
सिक्किम के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की सचिव कर्मा डी. युत्सो ने बताया कि मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्था के तहत यह मौसमी व्यापार नवंबर तक प्रत्येक सप्ताह सोमवार से बृहस्पतिवार के बीच संचालित होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘इस वर्ष 38 पंजीकृत व्यापारियों को व्यापार पास जारी किए गए हैं। इस मार्ग से अधिसूचित 36 वस्तुओं का व्यापार होगा, जिनमें हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, पारंपरिक धार्मिक सामग्री, रेडीमेड परिधान और अन्य स्वीकृत वस्तुएं शामिल हैं।’’
सचिव ने बताया कि सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही है। पहली बार महिला आईटीबीपी प्लाटून भी नाथूला में तैनात की गई है।
भारत-चीन के बीच वर्ष 1962 में हुए युद्ध के बाद नाथू ला दर्रा बंद कर दिया गया था, जिसे 2006 में चार दशक से अधिक समय बाद सीमा व्यापार के लिए फिर खोला गया था। यह दोनों देशों के बीच अधिसूचित सीमा व्यापार केंद्रों में से एक है और यहां सामान्यतः हर वर्ष मई से नवंबर तक व्यापार होता है।
उधर हिमाचल प्रदेश के प्राचीन सिल्क रूट माने जाने वले शिपकी ला दर्रे से भी दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू हुआ।
राज्य के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने 16 व्यापारियों को उनके घोड़ों के साथ तिब्बत के शिपकी गांव के लिए रवाना किया।
मंत्री ने बताया कि व्यापार वस्तु विनिमय (बार्टर) प्रणाली के तहत होगा। व्यापारियों को तिब्बती क्षेत्र में 72 घंटे तक व्यापार करने के बाद वापस लौटना होगा।
उन्होंने किन्नौर जिले की सीमावर्ती ग्राम पंचायत नामग्या के शिपकी ला क्षेत्र में 1.70 करोड़ रुपये की लागत से बने आधुनिक छुप्पन ट्रेड मार्ट का भी उद्घाटन किया। यह केंद्र सीमा व्यापार को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
भाषा यासिर पाण्डेय
पाण्डेय