मुद्रास्फीति का लक्ष्य स्थगित नहीं किया, भविष्य में ब्याज दर में बदलाव कीमतों पर निर्भर: मल्होत्रा

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मुद्रास्फीति का लक्ष्य स्थगित नहीं किया, भविष्य में ब्याज दर में बदलाव कीमतों पर निर्भर: मल्होत्रा

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  • Publish Date - June 5, 2026 / 07:05 PM IST,
    Updated On - June 5, 2026 / 07:05 PM IST

मुंबई, पांच जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने शुक्रवार को कहा कि मुद्रास्फीति का चार प्रतिशत का मध्यम अवधि का लक्ष्य महत्वपूर्ण है और इससे हटले का कोई सवाल ही नहीं है।

मल्होत्रा ​​ने संकेत दिया कि भविष्य में कोई भी मौद्रिक नीतिगत कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि मूल्य वृद्धि व्यापक और लंबी अवधि के लिए रहती है या नहीं।

आरबीआई ने 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है जो पहले के 4.6 प्रतिशत से कही अधिक है।

उन्होंने उन सुझावों को खारिज कर दिया कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति की तुलना में आर्थिक वृद्धि को प्राथमिकता दे रहा है। गवर्नर ने कहा, ‘‘मुद्रास्फीति लक्ष्य अपरिवर्तित है।’’

मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘लक्ष्य से हटने का सवाल ही नहीं है। यह वह लक्ष्य है जो सरकार ने हमें दिया है। यह चार प्रतिशत ही है और इसे बनाये रखने का हमारा प्रयास जारी है।’’

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति लक्ष्य को मध्यम अवधि में प्राप्त किया जाना है, न कि हर छोटी अवधि में इसमें घटने-बढ़ने पर कदम उठाने की जरूरत है। इसका कारण अस्थायी झटकों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई से वृद्धि पर प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं।

मल्होत्रा ने स्वीकार किया कि मुद्रास्फीति की स्थिति पहले से अधिक प्रतिकूल हो गई है। हालांकि, उन्होंने किसी भी तरह की तत्काल सख्ती का कोई संकेत नहीं दिया।

यह पूछे जाने पर मुद्रास्फीति के अनुमान में वृद्धि को क्या अगली समीक्षा में नीतिगत दर में वृद्धि की संभावना के रूप में देखा जाना चाहिए, उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा मामला बनता है या नहीं, यह मैं नहीं कह सकता। लेकिन जाहिर है कि यह (मुद्रास्फीति) पहले से अधिक प्रतिकूल है।’’

केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने तटस्थ रुख को कायम रखा है।’’

मल्होत्रा ​​ने कहा कि केंद्रीय बैंक इस बात पर बारीकी से नजर रखेगा कि मुद्रास्फीति का दबाव अस्थायी रहता है या व्यापक और स्थायी होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि यह एक बार की वृद्धि है, तो आप इसे नजरअंदाज कर सकते हैं। लेकिन अगर यह व्यापक हो रहा है, स्थायी हो रहा है, तो निश्चित रूप से इसका मतलब है कि कार्रवाई करने का समय आ गया है।’’

आरबीआई गवर्नर ने दोहराया कि केंद्रीय बैंक आंकड़ों पर निर्भर रहेगा और इस बात पर बारीकी से नजर रखेगा कि आपूर्ति आधारित मुद्रास्फीति के झटके कम होते हैं या स्थायी होते हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तेल की कीमतों का अपना अनुमान को संशोधित कर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जो पहले 85 डॉलर प्रति बैरल था। इस कारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के अनुमान में वृद्धि की गयी है।

भाषा रमण अजय

अजय