नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) भारत को 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य हासिल करने के लिए व्यापार की अधिक लागत, नियमों की जटिलता, बुनियादी ढांचे की कमी और वैश्विक एकीकरण में रुकावटों जैसी संरचनात्मक चुनौतियों से निपटना होगा। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
डब्ल्यूटीओ सचिवालय की भारत पर व्यापार नीति समीक्षा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्तीय समावेश के मामले में काफी प्रगति हुई है।
लेकिन साथ ही, नीतिगत रूपरेखा में अपेक्षाकृत अधिक शुल्क, आयात और निर्यात नियंत्रण का उपयोग, सरकारी व्यापार और बड़े पैमाने पर बजटीय सहायता कार्यक्रम (खासकर अनाज और उर्वरक की आपूर्ति के लिए) शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की व्यापार और निवेश नीति में क्षेत्रीय व्यापार समझौतों का विस्तार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नियमों का लगातार उदारीकरण और डिजिटलीकरण तथा सीमा शुल्क के आधुनिकीकरण के जरिये व्यापार को आसान बनाने की प्रयास शामिल हैं।
इसमें कहा गया, ‘‘आगे देखा जाए तो अगले वित्त वर्ष 2027-28 में वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। इसके साथ मजबूत वृद्धि का रुख जारी रहेगा…।’’
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘और आगे देखें तो, 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मजबूत आर्थिक प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए संरचनात्मक चुनौतियों से निपटना होगा। इन चुनौतियों में व्यापार की अधिक लागत, नियमों की जटिलता, बुनियादी ढांचे की कमी और वैश्विक एकीकरण में रुकावटें शामिल हैं।’’
कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम जैसे प्रक्रियात्मक और प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाते हुए, व्यापार के माहौल को बेहतर बनाने, उत्पादकता बढ़ाने और व्यापार-प्रतिबंधात्मक उपायों पर निर्भरता कम करने वाले सुधार, संसाधनों के अधिक कुशल आवंटन और प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे उपाय विदेशी निवेश को आकर्षित करने में भी मदद कर सकते हैं।
इसमें कहा गया है कि जैसे-जैसे भारत वैश्विक व्यापार में अपनी भूमिका बढ़ाना, निर्यात में विविधता लाना और अपने लंबे समय के विकास के लक्ष्यों को पूरा करना चाहता है, वैसे-वैसे आत्मनिर्भरता और खुलेपन के बीच संतुलन के साथ बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में भागीदारी और उसमें सुधार, उसके भविष्य की वृद्धि और मजबूती के लिए महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।
इसके अलावा, पिछले दशक में देश की निर्यात रणनीति में बाजार तक पहुंच बढ़ाने, आर्थिक साझेदारी को बेहतर बनाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखला के साथ एकीकरण को बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का फायदा उठाना शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘यह नई गति लंबे समय तक बाजार तक पहुंच सुरक्षित करने, शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने और भारतीय निर्यातकों को क्षेत्रीय और वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव को दिखाती है।’’
हाल के वर्षों में, भारत के व्यापार पर कई बाहरी चुनौतियों का असर पड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘वैश्विक तनाव, महामारी, जलवायु से जुड़ी घटनाओं और कुछ देशों द्वारा निर्यात पर रोक जैसे कारणों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट आई है। इससे जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता और लागत पर बुरा असर पड़ा है।’’
इसमें कहा गया कि भारत को कुछ व्यापार भागीदारों द्वारा गैर-शुल्क उपायों के बढ़ते इस्तेमाल का भी सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण विदेशी बाजारों में भारतीय उद्योग के लिए बाजार तक पहुंच सीमित हुई है।
भाषा रमण अजय
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