नवोन्मेष, डिजाइन, वैश्विक ब्रांडिंग से 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है आभूषण निर्यात: वाणिज्य सचिव

नवोन्मेष, डिजाइन, वैश्विक ब्रांडिंग से 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है आभूषण निर्यात: वाणिज्य सचिव

नवोन्मेष, डिजाइन, वैश्विक ब्रांडिंग से 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है आभूषण निर्यात: वाणिज्य सचिव
Modified Date: August 19, 2026 / 10:20 pm IST
Published Date: August 19, 2026 10:20 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि नवोन्मेष, ब्रांडिंग और वैश्विक स्तर के डिजाइन के जरिये एक व्यापक परिवेश विकसित करने से भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात वर्ष 2040 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

इस क्षेत्र का निर्यात वर्ष 2025-26 में 28 अरब डॉलर रहा था।

एक अनुमान के मुताबिक, 2040 तक यह क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1.2 प्रतिशत का योगदान देगा और देश के कुल वस्तु निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 14 प्रतिशत होगी।

अग्रवाल ने चिंतन शिविर में क्षेत्र के निर्यातकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने की वास्तविक क्षमता नवोन्मेष, वैश्विक डिजाइन नेतृत्व और भरोसे पर आधारित व्यापक परिवेश के निर्माण में है।

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत सोने, चांदी या कच्चे हीरों के खनन में नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में उपलब्ध कुशल कारीगरों में है। अधिक संपदा सृजन का रास्ता केवल सामान्य विनिर्माण से नहीं, बल्कि डिजाइन, नवोन्मेष और वैश्विक ब्रांड निर्माण से निकलेगा।

वाणिज्य सचिव ने मानव संसाधन में निवेश, कौशल विकास और उत्पादों को अलग पहचान देने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और 3डी प्रिंटिंग जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत के समृद्ध इतिहास, संस्कृति और कहानियों को आभूषणों के डिजाइन में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे देश की सांस्कृतिक पहचान और प्रभाव को मजबूती मिले।

उन्होंने घरेलू और निर्यात बाजारों में पारदर्शी एवं प्रौद्योगिकी आधारित भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई, ताकि नई पीढ़ी की बदलती पसंद के अनुरूप उत्पाद तैयार किए जा सकें।

चिंतन शिविर का आयोजन पांच प्राथमिकता वाले मिशन के आधार पर किया गया था। इनमें वैश्विक बाजार तक पहुंच, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) का विस्तार, निर्यात-आयात प्रक्रियाओं को तेज करना और कौशल विकास जैसे विषय शामिल थे।

भाषा रमण अजय

अजय


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