आईटीए ने भारत में 11 स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाओं को चुना, 1,800 करोड़ डॉलर का होगा निवेश
आईटीए ने भारत में 11 स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाओं को चुना, 1,800 करोड़ डॉलर का होगा निवेश
नयी दिल्ली, 13 अगस्त (भाषा) औद्योगिक बदलाव में तेजी लाने वाली वैश्विक पहल ‘इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन एक्सेलरेटर’ (आईटीए) ने भारत में महत्वपूर्ण स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाओं को गति देने के लिए ‘भारतीय परियोजना समर्थन कार्यक्रम’ के तहत 11 परियोजनाओं का चयन किया है।
आईटीए ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि इन परियोजनाओं को उनकी जरूरत के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इन परियोजनाओं से विभिन्न क्षेत्रों में सालाना 78 लाख टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन कटौती की जा सकती है।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी28) में शुरू 'आईटीए' ऊर्जा-गहन उद्योगों और परिवहन क्षेत्रों में औद्योगिक बदलाव को तेज करने के लिए काम करने वाली एक वैश्विक बहु-पक्षीय पहल है।
बयान के मुताबिक, जिंदल स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, एसीएमई समूह, यामना, सर्कुलर अर्बन एनर्जी (सीयूई) और रिन्यू जैसी कंपनियों की अगुवाई वाली चयनित परियोजनाओं में 1,800 करोड़ डॉलर से अधिक के संभावित निवेश की संभावना है।
इन परियोजनाओं से भवनों और बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी इस्पात और कंक्रीट जैसी स्वच्छ सामग्री, विमानन और जहाजरानी के लिए कम उत्सर्जन वाले ईंधन तथा कृषि उर्वरकों के लिए महत्वपूर्ण अमोनिया जैसे रसायनों का उत्पादन होगा।
इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन एक्सेलरेटर के प्रबंध निदेशक जेम्स स्कोफील्ड ने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक अस्थिरता से प्रभावित दुनिया में घरेलू स्तर पर स्वच्छ सामग्री का प्रतिस्पर्धी ढंग से उत्पादन आर्थिक मजबूती और दीर्घकालिक वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार होगा।’’
आईटीए ब्राजील, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), भारत और मिस्र में अपने कार्यक्रमों के तहत फिलहाल 39 परियोजनाओं को समर्थन दे रहा है। इन परियोजनाओं में 6,000-6,500 करोड़ डॉलर के निवेश की संभावना है।
जिंदल स्टील ओडिशा के अंगुल स्थित अपने एकीकृत इस्पात संयंत्र में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटाने की एक परियोजना विकसित कर रही है। इसके तहत उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड को अलग कर उसका इस्तेमाल मेथनॉल, एथनॉल, पॉलीकार्बोनेट और खनिज आधारित सामग्री जैसे उत्पाद बनाने में किया जाएगा।
जेएसडब्ल्यू स्टील, कार्बन क्लीन और बीएचपी के साथ मिलकर कर्नाटक के विजयनगर स्थित संयंत्र में कार्बन क्लीन की ‘साइक्लोनसीसी’ मॉड्यूलर प्रौद्योगिकी लगाने की व्यवहार्यता का मूल्यांकन कर रही है।
एसीएमई समूह ओडिशा के गोपालपुर और पारादीप में हरित रसायन परियोजनाएं विकसित कर रहा है। इनमें क्रमशः चार लाख टन और आठ लाख टन सालाना क्षमता वाले हरित अमोनिया संयंत्र तथा पारादीप में दो लाख टन सालाना क्षमता वाला हरित मेथनॉल संयंत्र शामिल है।
नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी रिन्यू पारादीप में हरित अमोनिया परियोजना विकसित कर रही है। इसके पहले चरण की क्षमता तीन लाख टन सालाना होगी और इसके 2029 तक वाणिज्यिक परिचालन शुरू होने की उम्मीद है।
यामना आंध्र प्रदेश में कृष्णापट्टनम बंदरगाह के पास हरित अमोनिया परियोजना विकसित कर रही है। इसकी कुल प्रस्तावित क्षमता 10 लाख टन तक है, जिसमें पहले चरण में पांच लाख टन सालाना क्षमता शामिल है।
सर्कुलर अर्बन एनर्जी (सीयूई) उत्तर प्रदेश में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र के भीतर कचरे से टिकाऊ विमानन ईंधन (एसएएफ) बनाने की परियोजना विकसित कर रही है। इसके तहत प्रतिदिन करीब 3,500 टन नगर निकाय और अन्य अवशिष्ट कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय
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