मुंबई, 28 मई (भाषा) महाराष्ट्र में प्याज उत्पादकों ने सरकारी एजेंसियों नेफेड और एनसीसीएफ द्वारा की जा रही खरीद प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता की मांग की है। साथ ही, उन्होंने उन किसानों के लिए तत्काल राहत और मुआवज़े की भी मांग की है, जिन्हें पिछले कई महीनों से अपनी उपज बहुत कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में, महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के संस्थापक-अध्यक्ष भरत दिघोले ने ‘भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारिता विपणन महासंघ’ (नेफेड) के माध्यम से की जा रही प्याज खरीद को लेकर कई सवाल उठाए।
संगठन ने पूछा कि नेफेड ने नासिक जिले और महाराष्ट्र के अन्य प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों की विभिन्न बाजार समितियों से वास्तव में कितनी प्याज की खरीद की है।
संगठन ने यह भी मांग की कि खरीद प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, एजेंसी किसानों से खरीदे गए प्याज के बारे में नाम, पते और मात्रा का विवरण प्रतिदिन सार्वजनिक रूप से जारी करे।
किसानों के इस संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या खरीद प्रक्रियाएं वास्तव में सभी प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों में चलाई जा रही हैं, या फिर इनका लाभ केवल एक सीमित वर्ग तक ही पहुंच रहा है।
बयान में आरोप लगाया गया कि महाराष्ट्र भर में प्याज उत्पादकों को कई महीनों तक अपनी उपज उत्पादन लागत से भी कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि संकट के इस दौर में सरकारी एजेंसियां निष्क्रिय बनी रहीं।
बयान में कहा गया, ‘जिन किसानों ने इस साल की शुरुआत में अपना प्याज बहुत ही कम कीमतों पर बेचा था, उन्हें मौजूदा खरीद दरों (1580 रुपये प्रति क्विंटल) के अनुपात में मुआवजा या सब्सिडी के रूप में आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।’
संगठन ने इस बात पर भी चिंता जताई कि क्या ‘भरतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ’ (ण्नसीसीएफ)—जिसे नेफेड के साथ मिलकर प्याज खरीद का लक्ष्य सौंपा गया था—ने वास्तव में ज़मीनी स्तर पर खरीद प्रक्रियाएं शुरू की हैं या नहीं।
किसानों के इस संगठन ने मांग की कि नेफेड और एनसीसीएफ खरीद से संबंधित दैनिक विवरण ऑनलाइन प्रकाशित करें। इन विवरणों में बाजार-वार खरीदी गई प्याज की मात्रा, लाभान्वित किसानों की संख्या और खरीद दरें शामिल होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के संदेह को दूर किया जा सके और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
संगठन ने प्याज उत्पादकों के लिए एक स्थायी ‘मूल्य सुरक्षा तंत्र’ स्थापित करने की भी मांग की। उनका कहना है कि निर्यात पर प्रतिबंध, निर्यात शुल्क और बाजार में हस्तक्षेप जैसे अचानक लिए गए नीतिगत निर्णयों के कारण किसानों को हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
इसके अलावा, संगठन ने प्याज उत्पादकों के सामने मौजूद मौजूदा संकट को हल करने के लिए मुख्यमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाने की भी मांग की।
भाषा राजेश राजेश अजय
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