शरद पवार ने राकांपा(शप) की बैठक में राजनीतिक हालात पर चर्चा की

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शरद पवार ने राकांपा(शप) की बैठक में राजनीतिक हालात पर चर्चा की

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  • Publish Date - May 20, 2026 / 03:08 PM IST,
    Updated On - May 20, 2026 / 03:08 PM IST

मुंबई, 20 मई (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)के अध्यक्ष शरद पवार ने देश और महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति और अपना खोया आधार वापस पाने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए बुधवार को मुंबई में बुलाई गई पार्टी की बैठक की अध्यक्षता की।

राकांपा (शप)विधायक और पवार के पोते रोहित पवार बैठक में शामिल नहीं हुए। हालांकि रोहित ने पार्टी से नाराजगी के दावों को ‘बेबुनियाद’ बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें अपने कर्जत-जामखेड़ निर्वाचन क्षेत्र और बारामती में किसानों को प्रभावित करने वाले एक जरूरी जल मुद्दे के समाधान करने के लिए पुणे जाना पड़ा।

यह बैठक उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ राकांपा में आंतरिक कलह की खबरों के बीच हुई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को कथित तौर पर दरकिनार कर दिया गया है। तटकरे ने पिछले सप्ताह शरद पवार से मुलाकात की थी।

राकांपा (शप) के सांसदों, विधायकों और 2024 के विधानसभा चुनावों के उम्मीदवारों ने दक्षिण मुंबई के वाईबी चव्हाण सेंटर में बुधवार को आयोजित पार्टी की बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक में 2024 के विधानसभा चुनावों और इस वर्ष की शुरुआत में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में राकांपा(शप)के प्रदर्शन पर विचार-विमर्श के साथ-साथ, प्रमुख राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर पार्टी के रुख के साथ-साथ 10 जून को होने वाले इसके स्थापना दिवस कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा की गई।

रोहित पवार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बैठक से अपनी अनुपस्थिति को लेकर चल रही अटकलों को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘मीडिया के एक धड़े में मेरे नाराज होने के बारे में प्रसारित हो रही खबरें निराधार हैं। हम आदरणीय पवार साहब के मार्गदर्शन में काम करने वाले कार्यकर्ता हैं।’’

रोहित पवार ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र (अहिल्यानगर जिले में) के कुकड़ी क्षेत्र और बारामती (पुणे जिले में) के किसानों के लिए जनाई-शिरसाई परियोजना से पानी का मुद्दा गंभीर हो गया है, जिसके कारण उन्हें पुणे में सिंचाई भवन का अचानक दौरा करना पड़ा।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर प्रशासन पर दबाव न होता और उन्होंने पानी छोड़ने के अपने वादे का सम्मान किया होता, तो मैं पुणे के सिंचाई भवन आने के बजाय आज मुंबई में पूर्व निर्धारित बैठक में शामिल हो सकता था।’’

भाषा धीरज नरेश

नरेश