नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) सरकार का मानना है कि जब प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा के एल्गोरिद्म किसी सामग्री की पहुंच बढ़ाने और उसकी दृश्यता तय करने में भूमिका निभाते हैं, तो उसे केवल ‘साधारण मध्यस्थ’ नहीं माना जा सकता, बल्कि वह ‘सेवा प्रदाता’ की भूमिका में आती है और उसे अधिक जिम्मेदारियां निभानी होंगी। सरकारी सूत्रों ने बुधवार को यह बात कही।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि ऐसी स्थिति में फेसबुक एवं इंस्टाग्राम की संचालक कंपनी मेटा को कानूनी संरक्षण हासिल नहीं है। हालांकि, कानून की व्याख्या और अंतिम निर्णय न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में है।
यह पूछे जाने पर कि क्या इस तरह के मामले में मेटा अपना कानूनी संरक्षण खो देती है, सूत्रों ने कहा कि इस पर फैसला अदालत को करना है।
उन्होंने कहा, ‘‘कानून की अंतिम व्याख्या न्यायपालिका ही करेगी लेकिन हमारा मानना है कि उन्हें प्रतिरक्षा हासिल नहीं है।’’
सूत्रों ने कहा कि प्रत्येक सेवा प्रदाता की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। मेटा द्वारा अपने मंच पर उपलब्ध सामग्री के संबंध में जिम्मेदारी स्वीकार करना सोशल मीडिया क्षेत्र में उसके रुख में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि जब मेटा ने मंच पर मौजूद सामग्री के लिए जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है, तो उसे आगे और भी कई जिम्मेदारियां निभानी होंगी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मेटा ने अपनी गलती स्पष्ट रूप से स्वीकार की है और बाल शोषण से जुड़ी सामग्री की सूचना भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने की प्रतिबद्धता जताई है।
मेटा ने बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की सूचना सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर देने पर सहमति जताई है। मेटा के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा था कि डिजिटल मंचों पर बच्चों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और वह सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मेटा अमेरिका मुख्यालय वाली पहली बड़ी प्रौद्योगिकी मध्यस्थ कंपनी है जिसने भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बाल सुरक्षा मामलों की सीधे सूचना देने की व्यवस्था बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे पहले मेटा ऐसे मामलों की सूचना अमेरिका स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन’ को देती थी।
भारत में सोशल मीडिया मंचों पर हानिकारक और अवैध ऑनलाइन सामग्री, खासकर बाल यौन शोषण सामग्री और डीपफेक को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने ऐसी सामग्रियों से निपटने के तरीके को लेकर मेटा को नोटिस भी जारी किए हैं और कंपनी के वैश्विक अधिकारियों को भारत तलब किया है।
जुलाई में सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े विज्ञापनों के मामले में मेटा को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद मेटा के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हुई, जिसमें सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसी सामग्री कानून का उल्लंघन है और इसे ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण नहीं मिल सकता।
एनसीपीसीआर ने इस मामले में औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया है और मेटा इंडिया के अधिकारियों को फिर तलब किया है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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