नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा के नए कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित इमेज जनरेटर टूल ‘म्यूज इमेज’ का मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत आकलन करेगी।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में मंत्रालय को प्राप्त होने वाले सुझावों और अन्य प्रतिक्रियाओं की भी जांच की जाएगी।
कृष्णन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मेटा के सबसे उन्नत एआई चित्र निर्माण उपकरण और सुपरइंटेलिजेंस लैब्स द्वारा विकसित पहले मीडिया निर्माण मॉडल ‘म्यूज इमेज’ को लेकर डेटा गोपनीयता, इमेज स्क्रैपिंग और उपयोगकर्ताओं की सहमति जैसे मुद्दों पर आलोचना और चिंता जताई जा रही है।
इमेज-स्क्रैपिंग का मतलब ऑनलाइन मंचों से तस्वीरों को उपयोगकर्ता की स्पष्ट अनुमति के बगैर स्वचालित रूप से इकट्ठा करने से है।
‘सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट’ से इतर कृष्णन ने कहा, ‘हमें यह देखना होगा कि यह मौजूदा कानूनी ढांचे के अनुरूप है या नहीं। इस मामले में हमें जो शिकायतें, सुझाव और अन्य प्रतिक्रियाएं मिलेंगी, उनकी समीक्षा की जाएगी।’
उल्लेखनीय है कि मेटा के इस नए फीचर को लेकर उपयोगकर्ताओं में काफी चर्चा है। इस फीचर के तहत लोग केवल एक साधारण ‘प्रॉम्प्ट’ (कमांड) में किसी का यूजरनेम टैग करके, उसके सार्वजनिक (पब्लिक) इंस्टाग्राम खाते से तस्वीरें लेकर एआई आधारित नई छवियां बना सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि यह फीचर सार्वजनिक खातों के लिए अपने आप (बाय डिफॉल्ट) चालू रहता है, इसलिए यह सहमति, गोपनीयता और इमेज-स्क्रैपिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अनजाने में उपयोगकर्ता एआई द्वारा बनाई गई किसी भी तस्वीर में खुद जैसी हूबहू शक्ल देख सकते हैं, जिसके लिए उन्होंने कोई स्पष्ट अनुमति नहीं दी थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर ‘ऑप्ट-आउट’ (मैन्युअल रूप से बंद करने की व्यवस्था) दृष्टिकोण उपयोगकर्ताओं की जागरूक पसंद के बजाय उनकी निष्क्रियता का फायदा उठाता है।
उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि मेटा द्वारा घोषित वॉटरमार्क सुरक्षा उपायों के बावजूद, अरबों उपयोगकर्ताओं के हाथ में आसानी से उपलब्ध होने वाली इस ‘डीपफेक’ क्षमता से यह पहचानना बेहद मुश्किल हो जाएगा कि कौन सी तस्वीर असली है और कौन सी एआई-जनित। इससे लोग डिजिटल रूप से अधिक असुरक्षित हो जाएंगे।
एस. कृष्णन ने बताया कि मेटा के स्वामित्व वाले व्हाट्सऐप के ‘यूजरनेम’ फीचर को लेकर केंद्र सरकार के नोटिस पर कंपनी का जवाब बृहस्पतिवार को अपेक्षित है।
पिछले बुधवार को केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप के प्रस्तावित ‘यूजरनेम’ फीचर को लेकर मेटा को नोटिस जारी किया था। सरकार ने आशंका जताई थी कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी और किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग (इम्पर्सोनेशन) जैसी साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
यूजरनेम’ फीचर के तहत उपयोगकर्ता अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना भी व्हाट्सऐप पर संवाद कर सकेंगे।
सरकार ने मेटा को निर्देश दिया था कि इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि तक परामर्श प्रक्रिया पूरी होने से पहले इस फीचर को भारत में शुरू नहीं किया जाए।
इसके बाद व्हाट्सऐप ने जवाब देने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मांगा था और सरकार को आश्वस्त किया था कि चर्चा पूरी होने तक यह फीचर भारत में लागू नहीं किया जाएगा।
सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट से इतर कृष्णन ने कहा, ‘आज जवाब देने की अंतिम तिथि है।’
टेलीग्राम और सिग्नल को भेजे गए नोटिस के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दोनों मंचों के पास अभी कुछ समय शेष है और उनके जवाब अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। सरकार इस पूरे मामले की जांच करेगी।
पिछले शुक्रवार को मेटा के प्रतिनिधियों ने नोटिस के बाद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की थी।
सरकार ने नोटिस में मेटा से पूछा था कि व्हाट्सऐप के नए फीचर के कारण यदि साइबर अपराध बढ़ने की आशंका है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।
भाषा योगेश अजय
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