बैंकों के सूक्ष्म-वित्त ऋण में दिसंबर तिमाही में 40 प्रतिशत की बड़ी गिरावट

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बैंकों के सूक्ष्म-वित्त ऋण में दिसंबर तिमाही में 40 प्रतिशत की बड़ी गिरावट

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 04:29 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 04:29 PM IST

मुंबई, 16 मार्च (भाषा) बैंकों का सूक्ष्म-वित्त पोर्टफोलियो चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 40 प्रतिशत घटकर 65,687 करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट सभी प्रकार के ऋणदाताओं में सबसे अधिक है। सोमवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

इक्विफैक्स और सिडबी की यह संयुक्त रिपोर्ट समर्पित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों एवं सूक्ष्म-वित्त संस्थान (एनबीएफसी-एमएफआई) और लघु वित्त बैंक (एसएफबी) को आवंटित ऋण आंकड़ों पर आधारित है।

रिपोर्ट के मुताबिक, परिसंपत्ति गुणवत्ता पर बने दबाव के कारण ऋण मंजूरी के मानकों को सख्त बनाया गया है। इसके तहत उधारकर्ताओं के स्तर पर ऋण की संख्या और कर्ज के स्तर को सीमित करने के लिए ‘सुरक्षा-उपाय’ किए गए हैं।

खासकर छोटे ऋणदाताओं के सामने नकदी की कमी रहने से भी आलोच्य अवधि में ऋण वितरण में कमी आई।

दिसंबर, 2025 तक समूचे सूक्ष्म-वित्त उद्योग का कुल बकाया पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 22 प्रतिशत और तिमाही आधार पर सात प्रतिशत घट गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, आलोच्य अवधि में बैंकों के बाद लघु वित्त बैंकों का पोर्टफोलियो 25 प्रतिशत, गैर-लाभकारी एमएफआई एवं अन्य का 22 प्रतिशत, एनबीएफसी-एमएफआई का 14 प्रतिशत और एनबीएफसी का चार प्रतिशत घटा।

उद्योग में बैंकों की बाजार हिस्सेदारी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में घटकर 25 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले 35 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट कहती है कि नए ऋण स्रोतों में एनबीएफसी-एमएफआई की हिस्सेदारी बढ़कर अब 44 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, निजी बैंकों ने सूक्ष्म-वित्त क्षेत्र में अपना जोखिम कम करना जारी रखा और उनके ऋण वितरण में 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इसके बावजूद दिसंबर तिमाही में नया ऋण वितरण सालाना आधार पर छह प्रतिशत बढ़कर 63,348 करोड़ रुपये हो गया।

राज्यों के स्तर पर बिहार सूक्ष्म-वित्त पोर्टफोलियो के आकार के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य बना रहा और उद्योग के कुल जोखिम का 16 प्रतिशत हिस्सा उसके पास है।

शीर्ष 10 राज्यों में उत्तर प्रदेश में पोर्टफोलियो में सालाना आधार पर सबसे कम 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि तमिलनाडु में गैर-भुगतान की दर सबसे कम रही।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय

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