मोबाइल फोन विनिर्माताओं का सीतारमण को पत्र, जीएसटी में 13 प्रतिशत कटौती की मांग

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मोबाइल फोन विनिर्माताओं का सीतारमण को पत्र, जीएसटी में 13 प्रतिशत कटौती की मांग

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  • Publish Date - September 14, 2026 / 07:36 PM IST,
    Updated On - September 14, 2026 / 07:36 PM IST

नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) मोबाइल फोन उद्योग के संगठन इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने घरेलू मांग में गिरावट के बीच सरकार से मोबाइल फोन पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर मौजूदा के 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की मांग की है।

संगठन ने कहा है कि मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण भी घरेलू मांग प्रभावित हो रही है।

आईसीईए ने दो सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में कहा कि भारत मात्रा के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता बन गया है और वित्त वर्ष 2025-26 में मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा।

मोबाइल फोन विनिर्माताओं के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने कहा कि घरेलू मांग हालांकि विनिर्माण और निर्यात की गति के अनुरूप नहीं बढ़ी है। ‘हैंडसेट’ की खपत घटी है, फोन बदलने की अवधि बढ़ी है और किफायती ‘स्मार्टफोन’ खंड दबाव में है।

आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने पत्र में कहा, “यह असंतुलन विनिर्माण वृद्धि के अगले चरण को प्रभावित करेगा, जब तक भारत अपने घरेलू बाजार में फिर से गति नहीं लाता। इसलिए आईसीईए सरकार से मोबाइल फोन पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने और मोबाइल फोन के कलपुर्जों पर भी दरों में इसी तरह युक्तिसंगत बदलाव करने का आग्रह करता है।”

उन्होंने कहा कि कम कर दर से अनौपचारिक और बिना कर वाले विक्रेताओं को मिलने वाला मूल्य लाभ कम होगा।

आईसीईए ने कहा कि भारत में आईफोन का निर्माण होने के बावजूद देश में इनकी कीमत मुख्य रूप से ऊंचे कर और रुपये के मूल्य में गिरावट के कारण काफी अधिक है।

संगठन के अनुसार, हाल में पेश आईफोन 18 श्रृंखला और आईफोन डुओ अमेरिका की तुलना में भारत में करीब 40,000 रुपये से 1.15 लाख रुपये तक महंगे हैं।

संगठन ने कहा कि अप्रैल, 2020 में मोबाइल फोन पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किए जाने से डिजिटल पहुंच के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख उपकरण की कीमत बढ़ गई।

महेंद्रू ने कहा, “इसके परिणामस्वरूप अधिक खरीद अधिकृत और कर-अनुपालक माध्यमों से होगी, जिससे औपचारिक कर आधार का विस्तार होगा और लेनदेन की निगरानी बेहतर होगी।”

आईसीईए ने कहा कि पिछले एक साल में भारत में विभिन्न ब्रांड के शुरुआती स्तर के स्मार्टफोन की कीमतें करीब 35 से 45 प्रतिशत बढ़ी हैं, जबकि 10,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की उपलब्धता तेजी से घटकर पांच प्रतिशत से भी कम रह गई है।

भाषा योगेश अजय

अजय