भारत गोल्ड माइंस में अपशिष्ट पदार्थों की डंपिंग के मौद्रीकरण में तेजी लाई जाए: संसदीय समिति
भारत गोल्ड माइंस में अपशिष्ट पदार्थों की डंपिंग के मौद्रीकरण में तेजी लाई जाए: संसदीय समिति
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) संसद की एक समिति ने खान मंत्रालय से कर्नाटक के कोलार गोल्ड फील्ड (केजीएफ) में स्थित भारत गोल्ड माइंस लि. (बीजीएमएल) के सोने से समृद्ध लगभग 3.3 करोड़ टन अपशिष्ट भंडार के मौद्रीकरण में तेजी लाने का आग्रह किया है।
सोने की खदानों के अपशिष्ट भंडार (टेलिंग डंप) ऐसे विशाल भंडारण स्थल होते हैं जिनमें सोने के खनन के बाद बचे हुए बारीक पत्थर, पानी और प्रसंस्कृत रसायन होते हैं। ये पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
बीजीएमएल खान मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला एक सार्वजनिक उपक्रम है जो 2001 से ही बंद पड़ा है। 2026-27 के बजट में इसके रखरखाव के लिए 8.75 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
संसद की कोयला, खान और इस्पात मामलों की स्थायी समिति ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा है कि केजीएफ में लगभग 3.3 करोड़ टन अपशिष्ट भंडार है। इनमें सोने और अन्य कीमती धातुओं को फिर से प्राप्त करने योग्य मात्रा मौजूद है। ये मौद्रीकरण के लिए चिन्हित किए गए हैं।
संसदीय समिति ने मंत्रालय से मौद्रीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है। समिति ने यह भी कहा कि इस संबंध में ताजा गतिविधियों से उसे अवगत कराया जाए।
बीजीएमएल की स्थापना अप्रैल 1972 में खान विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में हुई थी। इसका कार्यालय केजीएफ में स्थित था। बीजीएमएल मुख्य रूप से केजीएफ में और आंध्र प्रदेश में कुछ छोटे खनन कार्यों में सोने के खनन और उत्पादन में लगी हुई थी।
बीजीएमएल का संचालन आर्थिक रूप से अव्यावहारिक होने के बाद इसे बंद कर दिया गया था। मंत्रिमंडल ने 2006 में पूर्व कर्मचारी समिति के पहले अस्वीकृति के अधिकार के साथ वैश्विक निविदा के माध्यम से संपत्तियों के निपटान का निर्णय लिया था।
कुछ कारणों से मंत्रिमंडल का यह निर्णय लागू नहीं हो सका। हालांकि, खान मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान में सरकार बीजीएमएल के संबंध में भविष्य की योजनाओं और अन्य व्यवहारिक विकल्पों की तलाश कर रही है।
भाषा रमण अजय प्रेम
प्रेम

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